अंतरजिला युवा आदान प्रदान कार्यक्रम से लौटे युवाओं का महाविद्यालय में हुआ स्वागत
खैरथल ( हीरालाल भूरानी ) राजकीय महाविद्यालय खैरथल के राष्ट्रीय सेवा योजना से जुड़े पांच स्वयंसेवकों का पिछले दिनों माई भारत यूथ एक्सचेंज कार्यक्रम के तहत अंतरजिला युवा आदान प्रदान के लिए चयन हुआ था। इन युवाओं का इस यात्रा से लौटने पर समस्त शिक्षकों द्वारा स्वागत किया गया। कार्यक्रम अधिकारी साक्षी जैन के अनुसार बाड़मेर जिले की पांच दिवसीय इस यात्रा में भाग लेकर इन्होंने पश्चिमी राजस्थान की संस्कृति , सीमावर्ती गांवों के जीवन और ऐतिहासिक धरोहरों के महत्त्व को नजदीक से अनुभव किया।
माई भारत विभाग की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम से लौटकर बीए तृतीय वर्ष के छात्र कुशाल जाटव ने बताया कि जीवन के विविध पहलुओं को समझने के लिए इस तरह की यात्राएं बहुत आवश्यक होती है।
रजनदीप कौर ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि बाड़मेर की यह यात्रा विद्यार्थियों के लिए बहुत यादगार रही। रेगिस्तानी संस्कृति, लोक संगीत और लोगों की सादगी को युवाओं ने बहुत पसंद किया।
बबलू सिंह ने बताया कि बाड़मेर में पेट्रोलियम संसाधन के क्षेत्र की बड़ी इंडस्ट्री केयर्न एनर्जी का भ्रमण करना और तेल के कुओं से पेट्रोलियम संसाधन के दोहन की पूरी प्रक्रिया को समझना अत्यंत रोचक रहा। छात्रा निकिता ने जानकारी दी कि युवाओं ने कोयले की खदान से कोयला निकालने की प्रक्रिया को जाना तथा लिग्नाइट कोयले से बिजली बनाने की प्रक्रिया से रूबरू हुए। मनीषा ने युवाओं की वांकल विरात्रा माता मंदिर तथा राजस्थान का खुजराहों माने जाने वाले बाड़मेर के किराडू के सोमेश्वर मंदिरों के स्थापत्य कला की सराहना करते हुए इसे राजस्थान के ऐतिहासिक परिदृश्य को समझने का एक शानदार अवसर बताया। साथ ही युवाओं ने मुनाबाव बॉर्डर को नजदीक से देखा तथा सीमा पर खड़े हुए सैनिकों के जीवन के संघर्ष को भी गहराई से अनुभव किया। सभी विद्यार्थियों ने यह अविस्मरणीय अनुभव उपलब्ध करवाने का अवसर देने के लिए महाविद्यालय प्राचार्य डॉ. नीतू जेवरिया तथा समस्त शिक्षकों का आभार व्यक्त किया।