शिव महापुराण कथा में पार्वती जन्मोत्सव की संजीवन झांकी सजाई
सकट.(अलवर) कस्बे की नदी किनारे स्थित रामेश्वर चार धाम वीर हनुमान मंदिर में जय हनुमान जन उपयोगी सेवा संस्थान ट्रस्ट सकट के तत्वाधान में मंदिर पाटोत्सव के उपलक्ष्य में आयोजित मूर्ति प्राण प्रतिष्ठा व महारूद्राभिषेक के मौके पर चल रही शिव महापुराण कथा के चौथे दिन ऋषिकेश के कथा व्यास शिव चैतन्य ने देवी पार्वती का जन्म का प्रसंग सुनाया। कथा व्यास ने कहा कि पार्वती के जन्म की कथा हिंदू पौराणिक कथाओं का महत्वपूर्ण भाग है। देवी पार्वती भगवान शिव की पत्नी हैं और उन्हें शक्ति का अवतार माना जाता है। उनका जन्म राजा हिमालय के घर हुआ था। उनकी माता का नाम मेना था। बताया कि दक्ष प्रजापति की पुत्री सती ने भगवान शिव से विवाह किया था, लेकिन दक्ष प्रजापति ने शिव को अपने यज्ञ में आमंत्रित नहीं किया, इससे सती ने यज्ञ में आत्मदाह कर लिया था।
सती के आत्मदाह के बाद भगवान शिव ने उन्हें पुनर्जन्म लेने का आशीर्वाद दिया। सती ने राजा हिमालय के घर देवी पार्वती के रूप में पुनर्जन्म लिया। देवी पार्वती ने भगवान शिव को अपने पति के रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की। बताया कि वह भगवान शिव की पत्नी होने के साथ-साथ एक शक्तिशाली देवी भी है। कथा के दौरान माता पार्वती का जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया गया। इस मौके पर माता पार्वती सहित पिता राजा हिमालय व माता मेना की संजीवनी झांकी सजाई गई जो आकर्षण का केन्द्र रही। इस दौरान महिलाओं ने बंधाई गीतों पर जमकर नृत्य किया। मंदिर महंत रमाकांत जैमन ने बताया कि कथा सुनने के लिए प्रति दिन श्रद्धालु की भीड़ उमड़ रही है 1 फरवरी को हनुमान जन्मोत्सव, कथा विश्राम, मूर्ति प्राण प्रतिष्ठा व पूर्णाहुति व भंडारे का आयोजन किया जाएगा।