मरता क्या न करता: आत्मदाह की अनुमति या न्याय? भीलवाड़ा से जयपुर तक महासंग्राम की तैयारी में जुटे प्रताड़ित किसान

Feb 8, 2026 - 03:09
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मरता क्या न करता: आत्मदाह की अनुमति या न्याय? भीलवाड़ा से जयपुर तक महासंग्राम की तैयारी में जुटे प्रताड़ित किसान

भीलवाड़ा :(राजकुमार गोयल) भीलवाड़ा जिले के ग्राम जालिया और महुआखुर्द में पिछले 225 दिन से अधिक समय से जारी किसानों का आंदोलन अब निर्णायक मोड़ पर पहुँच गया है। जिंदल सॉ लिमिटेड द्वारा किए जा रहे अवैध ब्लास्टिंग व खनन  के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे किसानों ने अब स्थानीय सांसद को ज्ञापन सौंपकर केंद्र व राज्य सरकार से त्वरित हस्तक्षेप की मांग की है।
संवैधानिक आदेशों की अवहेलना का आरोप
किसानों का आरोप है कि खनन कंपनी न केवल सुरक्षा मानकों को ताक पर रख रही है, बल्कि संवैधानिक संस्थाओं के आदेशों की भी खुलेआम धज्जियाँ उड़ाई जा रही हैं। ज्ञापन के अनुसार:
• राष्ट्रपति सचिवालय द्वारा जुलाई 2025 में जारी निर्देशों पर स्थानीय प्रशासन ने कोई कार्रवाई नहीं की।
• वर्ष 2017 में माननीय न्यायालय (ADJ-2) द्वारा दिए गए स्थायी निषेधाज्ञा आदेश के बावजूद कंपनी नियम विरुद्ध ब्लास्टिंग जारी रखे हुए है।
DGMS की भूमिका पर उठे सवाल
आंदोलनकारियों ने खान सुरक्षा महानिदेशालय (DGMS) की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। किसानों का कहना है कि DGMS ने सितंबर 2024 में बिना किसी भौतिक सत्यापन (Physical Verification) के ब्लास्टिंग की अनुमति दे दी। साथ ही, जिला कलेक्टर और खनिज विभाग द्वारा पिछले 10 महीनों में भेजे गए किसी भी पत्र पर  DGMS ने जाच करना उचित नहीं समझा।
'साइलेंट किलर' बनी सूखी ड्रिलिंग (Dry Drilling)
ग्रामीणों ने शिकायत की है कि कंपनी द्वारा प्रतिबंधित 'ड्राई ड्रिलिंग' का प्रयोग किया जा रहा है। इससे उड़ने वाली सिलिका युक्त जहरीली धूल के कारण कृषि भूमि बंजर हो रही है और बच्चों व बुजुर्गों में सिलिकोसिस जैसी जानलेवा बीमारियों का खतरा बढ़ गया है।

"हमारी बस्तियाँ और सरकारी स्कूल डेंजर ज़ोन के भीतर हैं। भारी ब्लास्टिंग से मकानों में दरारें आ चुकी हैं। हम पिछले 225 दिनों से न्याय की गुहार लगा रहे हैं, लेकिन हमारी पुकार को प्रसासन वे सरकार अनसुनी कर रही है।" – ज्ञापन देने आये ग्रामीणों ने बताया कि जिन्दल कि अवैध ब्लास्टिंग से हमारा जीना मुस्किल कर रखा हे हमारे घरो में दरारे आ चुकी और खेतो में बड़े बड़े पत्थर आरहे हे जीसे कही बार हादसा भी हो चूका हे फिर भी प्रशासन मौन!!!
"सामूहिक आत्मदाह और जयपुर कूच की चेतावनी"
लंबे समय से चल रहे संघर्ष और प्रशासनिक संवेदनहीनता से हताश होकर किसानों ने अब कड़ा रुख अख्तियार किया है। ज्ञापन में बताया गया है कि ग्रामीणों ने महामहिम राज्यपाल से सामूहिक आत्मदाह (इच्छा-मृत्यु) की अनुमति माँगी है। यदि जल्द ही मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो ग्रामीण भारी संख्या में जयपुर कूच करेंगे। किसान प्रतिनिधि कन्हैया लाल माली ने बताया कि सांसद महोदय ने किसानो के प्रति सदभावना रखते हुय जिला कलेक्टर को लेटर लिखकर जालिया गाव में चलरहे किसान आन्दोलन को तुरंत संज्ञान लेकर किसानी को रहत दी जायगी जिन्दल कि अवैध ब्लास्टिंग व खनन को तुरंत बंद किया जायगा  

प्रमुख माँगें:
1. DGMS द्वारा जारी अनुमति की किसान प्रतिनिधि को टीम के साथ  उच्च स्तरीय  जाँच हो।
2. प्रतिबंधित 'ड्राई ड्रिलिंग' और अवैध खनन पर तुरंत रोक लगे।
3. सुरक्षा मानकों की निष्पक्ष जाँच होने तक ब्लास्टिंग पूरी तरह बंद हो।
4. आदेशों की अवहेलना करने वाले दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए।
5 जिंदल और किसानो के साथ हुय लिखित समझौते 
अब जालिया गाव के किसानो की की निगाहें सांसद के हस्तक्षेप और आगामी सरकारी कदमों पर टिकी हैं।

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