साक्षात मौत को मात: एंबुलेंस को लगे झटके ने लौटाई महिला की सांसें, 'ब्रेन डेड' घोषित होने के बाद स्वस्थ होकर लौटी घर
पीलीभीत/बरेली: (शशि जायसवाल) कहते हैं कि 'जाको राखे साइयां, मार सके न कोय'—यह कहावत पीलीभीत की रहने वाली 50 वर्षीय विनीता शुक्ला पर सटीक बैठती है। जिस महिला को बरेली के डॉक्टरों ने 'ब्रेन डेड' घोषित कर अंतिम संस्कार के लिए घर भेज दिया था, वह एक सड़क के गड्ढे से लगे झटके के कारण मौत के मुंह से वापस लौट आई। 13 दिनों के सफल इलाज के बाद विनीता अब पूरी तरह स्वस्थ होकर अपने पैरों पर चलकर घर लौट चुकी हैं।
अचानक बिगड़ी थी तबीयत
घटनाक्रम के अनुसार, शहर कोतवाली क्षेत्र की रहने वाली विनीता शुक्ला 22 फरवरी को घर का काम करते समय अचानक बेहोश हो गई थीं। उनके पति कुलदीप शुक्ला उन्हें तत्काल बरेली के एक निजी अस्पताल ले गए। वहां उनकी स्थिति गंभीर देखते हुए उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया।
डॉक्टरों ने मान ली थी हार
अस्पताल में जांच के दौरान विनीता का 'ग्लासगो कोमा स्केल' (GCS) स्तर 15 से गिरकर महज 3 पर आ गया था, जो मस्तिष्क के पूरी तरह निष्क्रिय होने का संकेत है। उनकी आंखों की पुतलियां फैल चुकी थीं और शरीर में कोई हलचल नहीं थी। डॉक्टरों ने उन्हें 'ब्रेन डेड' घोषित करते हुए परिजनों को घर ले जाने की सलाह दी। परिजनों ने भारी मन से घर पर अंतिम संस्कार की तैयारियां भी शुरू कर दी थीं।
सड़क के गड्ढे ने किया 'चमत्कार'
24 फरवरी को जब कुलदीप एंबुलेंस से अपनी पत्नी को लेकर बरेली से पीलीभीत लौट रहे थे, तब बरेली-हरिद्वार नेशनल हाईवे-74 पर एंबुलेंस एक गहरे गड्ढे के ऊपर से गुजरी। एंबुलेंस को लगे इस जोरदार झटके से विनीता के शरीर में अचानक हलचल हुई और उनकी सांसें चलने लगीं। कुलदीप ने इसे किसी चमत्कार से कम नहीं माना और तुरंत विनीता को पीलीभीत के न्यूरोसिटी अस्पताल में भर्ती कराया।
इलाज में सांप के काटने का संदेह
न्यूरोसर्जन डॉ. राकेश सिंह ने बताया कि विनीता के पैर पर दांतों के निशान मिले थे, जिससे 'न्यूरोटॉक्सिन' (सांप का जहर) का संदेह हुआ। इसी दिशा में एंटी-वेनम और सपोर्टिव ट्रीटमेंट शुरू किया गया। महज 24 घंटे के भीतर उनके शरीर ने सकारात्मक प्रतिक्रिया देनी शुरू कर दी।
स्वस्थ होकर लौटीं विनीता
उपचार के 13 दिन बाद विनीता अब पूरी तरह ठीक हैं। विनीता का कहना है कि बेहोश होने के बाद उन्हें कुछ याद नहीं, लेकिन अब वह बेहतर महसूस कर रही हैं। इस घटना ने न केवल परिवार को नई जिंदगी दी है, बल्कि पूरे इलाके में यह चर्चा का विषय बनी हुई है।