‘इंडिया @100: रिसर्जेंट भारत का रोडमैप 2047’ का भव्य विमोचन; आत्मनिर्भर भारत के लिए ग्रामीण विकास को प्राथमिकता देने की आवश्यकता
हलैना (विष्णु मित्तल) ग्रामीण विकास के प्रख्यात मर्मज्ञ, सामाजिक विचारक एवं समृद्ध भारत अभियान के निदेशक सीताराम गुप्ता तथा सीएसआर इंडिया के संस्थापक रुसेन कुमार द्वारा लिखित बहुचर्चित पुस्तक “इंडिया @100: रिसर्जेंट भारत का रोडमैप 2047” का भव्य विमोचन नई दिल्ली स्थित इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में एक गरिमामयी राष्ट्रीय सेमिनार के दौरान सम्पन्न हुआ। यह आयोजन न केवल पुस्तक विमोचन तक सीमित रहा, बल्कि भारत के भविष्य के विकास मॉडल पर एक सार्थक विमर्श का मंच भी बना।
इस महत्वपूर्ण अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में पूर्व केंद्रीय रेल मंत्री सुरेश प्रभु तथा विख्यात कृषि अर्थशास्त्री एवं पद्मश्री से सम्मानित अशोक गुलाटी उपस्थित रहे। विशिष्ट अतिथियों में बक्सर (बिहार) के सांसद सुधाकर सिंह, भारत में CSR एवं सस्टेनेबिलिटी के अग्रदूत डॉ. भास्कर चटर्जी, मनी कण्ट्रोल के प्रबंध संपादक नलिन मेहता, डॉ. जवाहर सूरीसेट्टी एवं सचिन जेकेएस हरिताश शामिल रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता स्वयं पुस्तक के मुख्य लेखक एवं समृद्ध भारत अभियान के निदेशक सीताराम गुप्ता ने की।
अपने संबोधन में सुरेश प्रभु ने कहा कि भारत को स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूर्ण होने तक एक समावेशी, आत्मनिर्भर एवं सतत विकासशील राष्ट्र बनाने के लिए सभी क्षेत्रों में समन्वित एवं योजनाबद्ध प्रयास आवश्यक हैं। उन्होंने नवाचार, नीति सुधार और जनभागीदारी को राष्ट्र की प्रगति का आधार बताते हुए कहा कि इस पुस्तक में प्रस्तुत विचारों को सरकार की विकास योजनाओं में शामिल किया जाना चाहिए, जिससे “विकसित भारत 2047” के लक्ष्य को प्राप्त करने में गति मिल सके।
वहीं अशोक गुलाटी ने पुस्तक की सराहना करते हुए कहा कि यह कृति भारत के दीर्घकालिक विकास के लिए एक व्यापक, व्यावहारिक एवं दूरदर्शी दृष्टिकोण प्रस्तुत करती है। विशेष रूप से कृषि, ग्रामीण विकास, आत्मनिर्भरता एवं महिला सशक्तिकरण जैसे क्षेत्रों में पुस्तक में दिए गए सुझाव नीति-निर्माताओं के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध हो सकते हैं।
कार्यक्रम की शुरुआत में सीताराम गुप्ता ने अपने विचार रखते हुए बताया कि यह पुस्तक “जीवन एवं आजीविका” के मूल सिद्धांत पर आधारित है। इसमें आम नागरिकों के जीवन स्तर को सुधारने के साथ-साथ व्यापक स्तर पर रोजगार सृजन के अवसरों को बढ़ाने पर विशेष बल दिया गया है। पुस्तक में स्वच्छ पेयजल, गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं, शिक्षा, कौशल विकास, डिजिटल अर्थव्यवस्था, कृषि, पशुपालन, पर्यटन, जल प्रबंधन एवं पर्यावरण संरक्षण जैसे महत्वपूर्ण विषयों का गहन एवं विश्लेषणात्मक अध्ययन प्रस्तुत किया गया है।
सह-लेखक रुसेन कुमार ने अपने संबोधन में कहा कि पुस्तक में देश के समक्ष मौजूद प्रमुख चुनौतियों—जैसे पर्यावरणीय गिरावट, बेरोजगारी, कुपोषण, कौशल की कमी एवं लैंगिक असमानता—की पहचान कर उनके समाधान के लिए मिशन मोड में कार्य करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया है। उन्होंने यह भी बताया कि भारत की जनसांख्यिकीय शक्ति, तेजी से विकसित हो रही डिजिटल क्षमताएं, सांस्कृतिक विविधता एवं उद्यमशीलता की भावना देश की सबसे बड़ी ताकत हैं, जिनका समुचित उपयोग कर भारत 2047 तक वैश्विक नेतृत्व की भूमिका निभा सकता है।
समृद्ध भारत अभियान के स्टेट हेड पुनीत गुप्ता ने जानकारी देते हुए बताया कि भरतपुर जिले की पावन धरा में जन्मे सीताराम गुप्ता एवं रुसेन कुमार द्वारा रचित इस महत्वपूर्ण पुस्तक के विमोचन अवसर पर देशभर के विभिन्न क्षेत्रों से अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। कार्यक्रम में भरतपुर, डीग, धौलपुर एवं जयपुर सहित विभिन्न जिलों के प्रतिनिधियों की उल्लेखनीय भागीदारी रही, जो इस आयोजन की व्यापकता और प्रभाव को दर्शाती है।
इस अवसर पर हेमराज गोयल, गौरव गुप्ता, नगेन्द्र सिंघल, राहुल बहती, रोहित पाल, शगुन सिंघल, सीडीपीओ महेन्द्र अवस्थी, मनीष गुप्ता, अभिषेक रंजन, ऐश्वर्या महाजन, मोनिका, विवेक प्रकाश, अरुण अरोड़ा, प्रो. रोहन वर्मा, एन.के. झा, कुमारी मनीषा, डॉ. के.के. उपाध्याय, डी. धर्मा, विष्णु मित्तल, रामेश्वर धाकड़, गोपाल ठाकुर सहित अनेक विशिष्ट अतिथि एवं बुद्धिजीवी उपस्थित रहे। यह पुस्तक न केवल “विकसित भारत 2047” की परिकल्पना को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण दस्तावेज है, बल्कि नीति-निर्माताओं, शोधकर्ताओं एवं समाज के विभिन्न वर्गों के लिए एक मार्गदर्शक के रूप में भी स्थापित होने की क्षमता रखती है।