संगम विश्वविद्यालय में बौद्धिक संपदा अधिकार (IPR) पर राष्ट्रीय कार्यशाला का सफल आयोजन
भीलवाड़ा : (राजकुमार गोयल) संगम विश्वविद्यालय के रिसर्च एंड आईपीआर सेल द्वारा आइक्यूएसी के सहयोग से “बौद्धिक संपदा अधिकार पेटेंट एवं डिज़ाइन फाइलिंग” विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया। इस कार्यशाला में कुल 147 प्रतिभागियों ने भाग लिया। कार्यक्रम की शुरुआत प्रो. राजीव मेहता द्वारा स्वागत संबोधन से हुई, जिसमें उन्होंने पेटेंट को “ग्रांट से जोड़ने” की आवश्यकता पर बल दिया। इसके पश्चात संगम विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. करुणेश सक्सेना ने “जुगाड़” शब्द के संदर्भ में नवाचार और भारतीय सोच की विशेषता पर अपने विचार रखे। प्रो-वीसी प्रो. मानस रंजन पाणिग्रही ने अपने संबोधन में कहा कि बौद्धिक संपदा अधिकार का अर्थ केवल पेटेंट तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें क्रिएटिव कॉमन्स जैसे अन्य आयाम भी शामिल हैं।
वहीं संगम विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार डॉ. आलोक कुमार ने कहा कि “शोध और पेटेंट किसी भी विश्वविद्यालय की शैक्षणिक उत्कृष्टता की पहचान होते हैं।” तकनीकी सत्रों में प्रथम वक्ता श्री पियूष यादव (सह-संस्थापक, आईपीक्वाड , नई दिल्ली) ने बौद्धिक संपदा अधिकार की मूल अवधारणा एवं उसके वर्गीकरण को सरल रूप में समझाया। दूसरे वक्ता एडवोकेट जसप्रीत सिंह (सह-संस्थापक, आईपीक्वाड , नई दिल्ली) ने पेटेंट को प्रौद्योगिकी हस्तांतरण से व्यावसायीकरण तक ले जाने की प्रक्रिया पर विस्तार से जानकारी दी। तीसरे सत्र में डॉ. विक्रम सिंह भाटी ने “संगम विश्वविद्यालय में शोध एवं विकास की गाथा” विषय पर प्रस्तुति दी।
उन्होंने वर्ष 2012 से 2026 तक संगम विश्वविद्यालय की प्रगति को 4P मॉडल (प्रोजेक्ट, प्रकाशन, पीएच.डी. एवं पेटेंट) के माध्यम से प्रस्तुत किया तथा विशेष रूप से 2021 के बाद हुई उल्लेखनीय वृद्धि को रेखांकित किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. श्वेता बोहरा द्वारा किया गया। कार्यक्रम के अंत में संगम विश्वविद्यालय के डॉ. पंकज सेन द्वारा धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया गया। इस प्रकार यह कार्यशाला शोध, नवाचार एवं बौद्धिक संपदा अधिकार के प्रति जागरूकता बढ़ाने में अत्यंत उपयोगी सिद्ध हुई।