जीरावला तीर्थ में नवपद ओली के पांचवें 'साधु पद' पर उत्सवों की धूम सेठ मोतीशाह के शौर्य और रजोहरण के अक्षताभिषेक ने मोहा 1000 आराधकों का मन
जीरावला (राजस्थान/ बरकत खान) शाश्वत नवपद ओली महापर्व के पावन प्रसंग पर आज पांचवें दिन 'साधु पद' की भावपूर्ण आराधना की गई। श्रमणीगणनायक आचार्यदेव श्री रश्मिरत्नसूरीश्वरजी महाराज आदि 100साधु-साध्वी भगवंतों की पावन निश्रा में जीरावला पार्श्वनाथ जैन तीर्थ भक्ति के रंग में सराबोर हो उठा।
साधु जीवन की महिमा और संयम का उत्सव
बाली निवासी संघवी चंद्रावती बेन प्रकाशचंद्र (मुंबई) परिवार द्वारा आयोजित इस मांगलिक प्रसंग पर आचार्य श्री रश्मिरत्नसूरीश्वरजी ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि साधु वे महापुरुष हैं जो पंच महाव्रतों का पालन कर आत्म-कल्याण और जगत-कल्याण के मार्ग पर चलते हैं। भक्तों ने साधु के 27 गुणों का स्मरण किया और आयंबिल शालाओं में बड़ी संख्या में आराधकों ने विगई रहित 'आयंबिल' तप की साधना की।
पारंपरिक वेषभूषा और सांस्कृतिक छटा
उत्सव का मुख्य आकर्षण पाघड़ी मंडल रहा। भारतीय पारंपरिक धोती-खेस और पाघड़ी में सज्ज 37 श्रावकों ने मंदिर परिसर में पूरी श्रद्धा के साथ श्री पंचकल्याणक पूजा पढ़ाई। इस दौरान सौराष्ट्र की पारंपरिक वेषभूषा में युवाओं ने डांडिया नृत्य कर वातावरण को हर्षोल्लास से भर दिया। दोपहर में जैनम शाह द्वारा आयोजित 'रजोहरण अक्षताभिषेक' ने श्रद्धालुओं को दीक्षादानेश्वरी संयम जीवन की अनुभूति कराई।
सेठ मोतीशाह के नाटक ने लूटी वाहवाही
रात्रि में 'संवेदना की रात्रि' कार्यक्रम के तहत मुंबई की 'रंगत प्रोडक्शन' की प्रोफेशनल टीम द्वारा ऐतिहासिक नाटक का मंचन किया गया। पंडित हार्दिक के निर्देशन में विदेशी ताकतों (अंग्रेजों) के छक्के छुड़ाने वाले महान दानवीर सेठ मोतीशाह के शौर्य और वीरता की गाथा देख 1000 से अधिक आराधक और मुंबई से आए अतिथि भावविभोर हो उठे।
आज की विशेष आराधना
पन्यास यशरत्नविजयजी महाराज ने बताया कि साधु पद की आराधना हमें कठिन परिस्थितियों में भी समभाव रखना सिखाती है। इसी क्रम में, कल छठे दिन [सम्यक् दर्शन] की विशेष आराधना और अनुष्ठान संपन्न कराए जाएंगे।