जीरावल: (राजस्थान/ बरकत खान)शाश्वत नवपद ओली महापर्व के छठे दिन आज जीरावल तीर्थ में श्रद्धालुओं ने 'सम्यक् दर्शन पद' की विशेष आराधना की। पूज्य 500 श्रमणीगण नायक आचार्य श्री रश्मिरत्नसूरीश्वरजी म.सा. एवं पन्यास श्री यशरत्नविजयजी महाराज के पावन सानिध्य में भव्य धर्मसभा का आयोजन किया गया।
मुख्य आकर्षण: धर्मसभा के दौरान 100 किलो पुष्पों से निर्मित 40 बाय 30 फुट का विशाल राजोहरण आकर्षण का केंद्र रहा, जिसे देखकर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे।
आध्यात्मिक संदेश (प्रवचन के मुख्य अंश):
- आचार्य श्री रश्मिरत्नसूरीश्वरजी म.सा. ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि "सम्यक् दर्शन धर्म तत्व का प्राण और मोक्ष नगरी का प्रवेश द्वार है।" उन्होंने संदेश दिया कि "खुद को खुद में खोजें" और स्पष्ट किया कि सच्ची समझ (सम्यक्त्व) के बिना मोक्ष की प्राप्ति संभव नहीं है।
- पन्यास श्री यशरत्नविजयजी महाराज ने श्रद्धा की शक्ति पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इंसान को शारीरिक 'अशक्ति' नहीं, बल्कि सांसारिक 'आसक्ति' (Attachment) डुबोती है। उन्होंने श्रीपाल और मयणासुंदरी का उदाहरण देते हुए आसक्ति से बचने की प्रेरणा दी।
बहुमान एवं सम्मान: इस मांगलिक अवसर पर लाभार्थी परिवार द्वारा मुमुक्षु कोमल (भटाना) एवं डीसा की मुमुक्षु बहन का तिलक, श्रीफल, हार व रजत मुद्रा (मोमेंटो) से बहुमान किया गया। साथ ही महाविदेह धाम के ट्रस्टी डॉ. संजय, प्रवीण, चिंटू, स्नेहल, नितिन व रमेश भाई का भी मोमेंटो देकर सम्मान किया गया।
आगामी कार्यक्रम: कल मंगलवार को भगवान महावीर स्वामी के 2624वें जन्म कल्याणक के उपलक्ष्य में तीर्थ परिसर में एक भव्य रथयात्रा निकाली जाएगी, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के जुटने की संभावना है।