भरतपुर में बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ योजना बनी बदलाव की मिसाल 22 बालिकाओं को मिले 1 लाख 10 हजार रुपये के चेक
भरतपुर, (कौशलेन्द्र दत्तात्रेय) महिला अधिकारिता विभाग द्वारा माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन और मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में प्रदेश में बालिकाओं की शिक्षा, स्वास्थ्य और सशक्तिकरण को लेकर उल्लेखनीय कार्य किए जा रहे हैं। इस दिशा में भरतपुर जिला एक प्रेरणादायक उदाहरण बनकर उभरा है।
महिला अधिकारिता विभाग के उप निदेशक राजेश कुमार ने बताया कि बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ योजना की शुरुआत 22 जनवरी 2015 को देश के 100 जिलों में की गई थी, जिसमें भरतपुर भी शामिल था। बाद में 8 मार्च 2018 से इस योजना का विस्तार देश के सभी जिलों में किया गया। इस योजना का मुख्य उद्देश्य गिरते बाल लिंगानुपात में सुधार, कन्या भ्रूण हत्या पर रोक तथा बालिकाओं की शिक्षा और सशक्तिकरण को बढ़ावा देना है। यह योजना केवल एक सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि सामाजिक सोच में बदलाव लाने वाला जन आंदोलन बन चुकी है, जो बेटियों के प्रति सम्मान, सुरक्षा और आत्मनिर्भरता की भावना को मजबूत कर रहा है।
नवाचारों के जरिए बदली तस्वीर-
उन्होंने बताया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में भरतपुर जिले में योजना के अंतर्गत कई नवाचार किए गए। ग्राम स्तर पर साथिनों को एक दिवसीय प्रशिक्षण देकर उन्हें अधिक सक्षम बनाया गया, जिससे वे समाज में जागरूकता फैलाने का कार्य प्रभावी ढंग से कर सकें। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रही बालिकाओं के लिए जिला सूचना एवं जनसंपर्क कार्यालय की नई लाइब्रेरी में 160 से अधिक पुस्तकों की व्यवस्था की गई है। इन पुस्तकों में कंप्यूटर, गणित, विज्ञान, इतिहास, भूगोल और अंग्रेजी जैसे विषय शामिल हैं। यह सुविधा निःशुल्क उपलब्ध कराई जा रही है, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को राहत मिली है।
बेटी जन्म पर उत्सव और सम्मान, मेधावी बालिकाओं को प्रोत्साहन-
उन्होंने बताया कि जिले के जनाना अस्पताल, सीएचसी और पीएचसी में बेटी के जन्म पर प्रसूताओं को 2000 से अधिक खेस वितरित किए गए। इसके साथ ही बेटी जन्मोत्सव मनाकर केक कटवाया गया और बेबी किट व बधाई संदेश देकर परिवारों को सम्मानित किया गया। इस पहल ने समाज में बेटियों के प्रति सकारात्मक सोच को बढ़ावा दिया है। 24 जनवरी 2026 को राष्ट्रीय बालिका दिवस के अवसर पर 22 मेधावी बालिकाओं को 5000 रुपये एवं प्रतीक चिह्न देकर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर कुल 1 लाख 10 हजार रुपये के चेक वितरित किए गए, जिससे बालिकाओं को आगे बढ़ने की प्रेरणा मिली।
बाल विवाह रोकथाम की दिशा में पहल-
बाल विवाह मुक्त भारत अभियान के तहत जिले में रैलियों, संगोष्ठियों और कार्यशालाओं का आयोजन किया गया। धर्मगुरुओं को भी इस अभियान से जोड़कर बाल विवाह न करने की शपथ दिलाई गई, जिससे समाज में व्यापक जागरूकता फैली।
शहरों से ढाणियों तक पहुंची जागरूकता-
योजना के प्रभावी प्रचार-प्रसार के लिए सुपरवाइजर और साथिनों को डायरी, पुस्तकें, कैलेंडर और पम्पलेट जैसी आईईसी सामग्री उपलब्ध कराई गई। इसके माध्यम से शहरों से लेकर दूरस्थ ढाणियों तक बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ का संदेश पहुंचाया गया। भरतपुर जिले में किए गए ये प्रयास न केवल योजनाओं के सफल क्रियान्वयन को दर्शाते हैं, बल्कि यह भी साबित करते हैं कि जब सरकार और समाज मिलकर कार्य करते हैं, तो सकारात्मक बदलाव संभव है। बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ योजना आज एक सशक्त अभियान बन चुकी है, जो बेटियों के उज्ज्वल भविष्य की मजबूत नींव रख रही है।