280 दिन से संघर्षरत किसान अब जयपुर कूच को तैयार; जालिया गांव से भीलवाड़ा तक प्रताड़ित किसानों का महासंग्राम
भीलवाड़ा (बृजेश शर्मा) भीलवाड़ा जिले की बनेड़ा तहसील के ग्राम जालिया में पिछले 280 दिनों से जारी अवैध ब्लास्टिंग और खनन विरोधी आंदोलन अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुका है।
जिंदल शॉ लिमिटेड द्वारा की जा रही कथित अवैध गतिविधियों के खिलाफ किसान लगातार जिला प्रशासन, खनिज विभाग और सरकार को ज्ञापन सौंपते रहे हैं, लेकिन कार्रवाई के अभाव में अब यह आंदोलन भीलवाड़ा से जयपुर तक जाने की तैयारी में है।
किसानों ने आरोप लगाया कि खनन कंपनी सुरक्षा मानकों की धज्जियाँ उड़ा रही है और संवैधानिक संस्थाओं के आदेशों की भी सीधी अवहेलना हो रही है। किसानों का कहना है कि जुलाई 2025 में राष्ट्रपति सचिवालय के निर्देशों के बावजूद कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। इसके साथ ही 2017 में ADJ-2 न्यायालय द्वारा जारी स्थायी निषेधाज्ञा के बाद भी ब्लास्टिंग लगातार जारी है, जिससे ग्रामीणों का रोष बढ़ता जा रहा है।
आंदोलनकारियों ने DGMS की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि सितंबर 2024 में क्षेत्र का भौतिक सत्यापन किए बिना ही ब्लास्टिंग की अनुमति जारी कर दी गई, जबकि जिला प्रशासन और खनिज विभाग के पत्रों को भी नजरअंदाज कर दिया गया। ग्रामीणों ने कहा कि यह अनुमति बिना जांच के कैसे जारी हो गई, इसकी उच्च स्तरीय जांच आवश्यक है।
प्रतिबंधित ड्राई ड्रिलिंग को ग्रामीणों ने ‘साइलेंट किलर’ बताते हुए कहा कि इससे फैलने वाली सिलिका युक्त धूल कृषि भूमि को बंजर बना रही है और सिलिकोसिस जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि गांव की बस्तियां, सरकारी स्कूल तक डेंजर ज़ोन में आ गए हैं। भारी ब्लास्टिंग से मकानों में दरारें आ चुकी हैं, खेतों में बड़े-बड़े पत्थर गिरते हैं, कई बार हादसे हुए हैं और कहीं मकान तक ढह चुके हैं, लेकिन प्रशासन अब तक मौन है।
ग्रामीणों ने राजनीतिक उपेक्षा पर भी गहरा आक्रोश व्यक्त किया। उनका कहना है कि “राजस्थान में डबल इंजन की सरकार होने के बावजूद जालिया के किसानों की सुनवाई नहीं हो रही। विधायक लाला राम बेरवा ने आगुचा माइंस का मुद्दा तो उठाया, लेकिन जालिया गांव के किसानों के शोषण पर अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। ग्रामीणों ने उन पर जिंदल कंपनी से मिलीभगत का भी आरोप लगाया।”
लगातार संघर्ष से थके किसानों ने अब आंदोलन को उग्र करने की चेतावनी देते हुए महामहिम राज्यपाल से सामूहिक आत्मदाह (इच्छा-मृत्यु) की अनुमति मांगी है। किसानों ने साफ कहा कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो सभी आंदोलनकारी जयपुर कूच करेंगे।
माली सैनी महासभा के प्रदेश संगठन मंत्री कन्हैया लाल माली ने कहा कि यदि प्रशासन किसान हितों की अनदेखी करता रहा तो यह आंदोलन जल्द ही प्रदेश-स्तरीय बड़ा किसान आंदोलन बन सकता है और इसकी सम्पूर्ण जिम्मेदारी सरकार व प्रशासन की होगी। उन्होंने याद दिलाया कि किसानों का समझौता भीलवाड़ा प्रशासन की मौजूदगी में हुआ था, लेकिन आज वही प्रशासन चुप्पी साधे हुए है।
किसानों ने अपनी प्रमुख मांगों में DGMS अनुमति की उच्च स्तरीय जांच, अवैध ब्लास्टिंग व ड्राई ड्रिलिंग पर रोक, जांच पूरी होने तक ब्लास्टिंग बंद करने, दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई और जिंदल–किसान समझौते का तुरंत पालन कराने की मांग दोहराई। साथ ही ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि लापिया पॉइंट पर लगे ठेकेदार को तुरंत नहीं हटाया गया तो स्थिति और अधिक विस्फोटक हो जाएगी।
जालिया गांव के किसान अब सरकार और जनप्रतिनिधियों की ठोस एवं समयबद्ध कार्रवाई की प्रतीक्षा कर रहे हैं। यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो यह आंदोलन भीलवाड़ा से जयपुर तक बड़े जनआंदोलन का रूप ले सकता