पीटीआई भर्ती 2013 का मामला; कूटरचित तरीके से नियुक्ति हासिल करने वाले अयोग्य अभ्यर्थियों की नौकरी पर लटकी हुई है तलवार
राजस्थान हाइकोर्ट ने राज्य सरकार को लगाई फटकार
माध्यमिक शिक्षा निदेशक को व्यक्तिश हाइकोर्ट में उपस्थित होने का फरमान
हाइकोर्ट ने राज्य सरकार को जवाब देने के लिए अंतिम अवसर के रूप में 2 सप्ताह का समय दिया
जयपुर (कमलेश जैन) पीटीआई भर्ती 2013 के मामले में राजस्थान हाइकोर्ट जयपुर ने डॉ जुबेर खान की याचिका पर जस्टिस आनंद शर्मा ने राज्य सरकार व अन्य को फटकार लगाते हुए आदेश दिए। पीटीआई भर्ती 2013 से जुड़े इस मामले में राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार की लापरवाही पर सख्त रुख अपनाया है। डॉ जुबेर खान बनाम राजस्थान सरकार व अन्य के मामले में एडवोकेट तनवीर अहमद ने याचिकाकर्ता का पक्ष रखते हुए नियुक्तियों में हुई धांधली और नियमों की अनदेखी को उजागर किया है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि अनेक अभ्यर्थियों ने कूट रचित तरीके से और राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद के नियमों के विरुद्ध शारीरिक शिक्षा की डिग्री हासिल कर नियुक्तियां प्राप्त कीं।
पीटीआई भर्ती 2013 में ऐसे ऐसे अभ्यर्थी भी नियुक्ति ग्रहण कर चुके हैं। जिनके पास शारीरिक शिक्षा डिग्री तो है, परंतु शारीरिक डिग्री हासिल करने योग्यता तक नहीं है। यह मामला राजस्थान हाइकोर्ट जयपुर में पिछले कई वर्षों से लंबित है और राज्य सरकार की ओर से 9 साल बीत जाने के बाद भी जवाब तक पेश नहीं किया गया है। राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को फटकार लगाते हुए जवाब दाखिल करने के लिए दो सप्ताह का अंतिम समय दिया है।
याचिका का उत्तर दाखिल न करने के कारण और पिछले 9 वर्षों की देरी के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर निदेशक द्वारा कार्रवाई के विवरण के मामले में राजस्थान हाइकोर्ट ने माध्यमिक शिक्षा निदेशक को 21 अप्रैल 2026 को व्यक्तिगत रूप से हाइकोर्ट में उपस्थित होने का आदेश दिया है।
भारत सरकार के युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय की समिति के सदस्य रह चुके याचिकाकर्ता डॉ जुबेर खान ने बताया कि पीटीआई भर्ती का विज्ञापन सितंबर 2013 में जारी हुआ तथा लिखित परीक्षा फरवरी 2015 में आयोजित की गई। इसके पश्चात मुख्य एवं प्रतिक्षा सूची सहित नियुक्तियां वर्ष 2016 से 2021 के बीच चरणबद्ध तरीके से दी गईं।
अधिवक्ता वाजिब अली ने बताया कि पीटीआई भर्ती 2013 की समस्त नियुक्तियां व स्थायीकरण डॉ जुबेर खान की याचिका के तहत हैं। इसी कारण कूट रचित तरीके से नियुक्ति हासिल करने वाले अयोग्य अभ्यर्थियों की नौकरी पर तलवार लटकी हुई है।