एक ऐसा महान क्रांतिकारी जिसने वह कर दिखाया था जिसके हौसले का कोई मुकाबला नहीं - कमल नारायण
अंता (शफीक मंसूरी ) कस्बे में स्थित शिवाजी चौक पर एक श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया जिसमे 1857 की क्रांति के सूत्रधार महान क्रांतिकारी योद्धा मातादीन वाल्मीकि को अंबेडकर जयंती समारोह समिति के पदाधिकारियों एवं अंबेडकर विचारधारा से जुड़े लोगों द्वारा भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई। अंबेडकर जयंती समारोह समिति के संरक्षक मदन लाल भारती एवं समिति अध्यक्ष जगदीश पंवार ने बताया कि बुद्धवार शाम को 1857 की क्रांति के सूत्रधार महान क्रांतिकारी मातादीन वाल्मीकि के छाया चित्र के समक्ष पुष्प अर्पित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई। मातादीन वाल्मीकि के जीवन से हमें प्रेरणा लेनी चाहिए जिन्होंने अत्याचारों को सहने की बजाय फांसी पर लटकना स्वीकार किया।
राकेश गोडाला अंबेडकर जयंती समारोह समिति अंता के सचिव राकेश गोडाला ने बताया कि मातादीन वाल्मीकि को जातिगत भेदभाव के चलते पानी पीने से रोका गया जिस पर ज़बाब में उन्होंने कहा कि एक दलित के पानी पीने से आप अपवित्र हो रहे हो लेकिन हमारे पूजनीय जानवरों की चर्बी से बने कारतूसों को मुंह से छिलने पर आप कैसे अपवित्र होने से बच रहे। इसी को लेकर मंगल पांडे ने अंग्रेजों के खिलाफ 1857 की क्रांति का बिगुल बजाया। इतिहासकारों ने मंगल पांडे का हर जगह चर्चा किया लेकिन क्रांति के असली सूत्रधार मातादीन वाल्मीकि को कहीं कोई स्थान नहीं दिया गया। वाल्मीकि को 8 अप्रैल 1857 को मुख्य अपराधी मानते हुए फांसी की सजा दी गई जहां उन्होंने हंसते हंसते प्राण त्याग दिए। ऐसे क्रांतिकारी थे मातादीन वाल्मीकि। इस मौके पर व्याख्याता कमल नारायण, गजेन्द्र शांत, एडवोकेट अनूप मेघवाल, मदनलाल भारती, अध्यापक हरिप्रकाश मेघवाल, अध्यापक धर्मराज मेघवाल, एडवोकेट प्रेम शंकर, व्याख्याता लटूर लाल महावर, संजय बागड़ी, एडवोकेट देशराज, भूपेंद्र बौद्ध, एडवोकेट कृष्ण कुमार मेघवाल, कालूलाल महावर, सुनील आदि लोग मौजूद रहे।


