हाईकोर्ट से ईंट भट्टा संचालकों को बडी राहत; सरकार से 150 दिनों की रॉयल्टी वसूली पर हाईकोर्ट ने मांगा जवाब
हलैना (विष्णु मित्तल)राजस्थान उच्च न्यायालय ने जिले के ईंट.भट्टा संचालकों द्वारा दी गई एक याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार और खनन विभाग को कड़े घेरे में लिया है।
मामला राजस्थान लघु खनिज रियायत नियमावली- 2017 के तहत रॉयल्टी गणना के उस फॉर्मूले से जुड़ा है, जिसमें ईंट.भट्टों से सालाना 150 दिनों के आधार पर टैक्स वसूला जा रहा है, जबकि सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार ये भट्टे साल में केवल 122 दिन ही चल सकते हैं।
- क्या है मुख्य विवाद
ईंट भट्टा संघ भरतपुर द्वारा दायर याचिका ; सीडब्ल्यू-20021/2025) में अधिवक्ता प्रियांशा गुप्ता ने दलील दी कि नियमावली के नियम 53(2) में रॉयल्टी गणना के लिए 150 का अंक एक मल्टीप्लायर के रूप में उपयोग किया जाता है। याचिकाकर्ता का दावा है कि यह अंक 150 दिनों को दर्शाता है।
दूसरी ओर सुप्रीम कोर्ट ने एनसीआर ब्रिक किन एसोसिएशन बनाम केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्डश् मामले में स्पष्ट आदेश दिया है कि प्रदूषण नियंत्रण के मद्देनजर ईंट.भट्टे केवल 1 मार्च से 30 जून तक ;कुल 122 दिनद्ध ही संचालित किए जा सकते हैं। याचिकाकर्ता ने अदालत में भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) की 2011, 2012 और 2016 की रिपोर्ट पेश की, जिसमें स्पष्ट रूप से इस फॉर्मूले के 150 अंक को 150 दिन बताया गया है। भरतपुर के खनन अभियंता द्वारा 2004 में दी गई एक साइट रिपोर्ट में भी 150 के साथ दिन शब्द का प्रयोग किया गया था।
तर्करू जब सुप्रीम कोर्ट के आदेश से भट्टे केवल 122 दिन चल रहे हैंए, तो 150 दिनों की रॉयल्टी वसूलना न केवल अतार्किक है बल्कि व्यापारियों का आर्थिक शोषण भी है। इस पर हाईकोर्ट राजस्थान के माननीय न्यायाधीश अनुरूप सिंघी की एकल पीठ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए नाराजगी जाहिर की कि सरकार द्वारा बार.बार हलफनामा दायर करने के बावजूद यह स्पष्ट नहीं किया जा सका है कि आखिर यह 150 का अंक क्या दर्शाता है और इसका आधार क्या है। व कोर्ट ने राजस्थान के महाधिवक्ता को स्वयं पेश होकर इस तकनीकी विसंगति को स्पष्ट करने और न्यायालय की सहायता करने का निर्देश दिया है।
सरकार को इस 150 अंक के पीछे के उद्देश्य और तर्क को स्पष्ट करने के लिए अंतिम अवसर दिया गया है। मामले की अगली सुनवाई 14 जुलाई 2026 को तय की गई है।ईंट.भट्टा संघ भरतपुर के सदस्यों का कहना है कि वे लंबे समय से इस दोहरी मार को झेल रहे थे।
एक तरफ कार्य दिवसों की कटौती और दूसरी तरफ अतिरिक्त दिनों का टैक्स। हाईकोर्ट के इस कड़े रुख के बाद अब उम्मीद जगी है कि रॉयल्टी की दरों को कार्य दिवसों ;122 दिनद्ध के अनुपात में कम किया जाएगा, जिससे सैकड़ों व्यापारियों को बड़ी वित्तीय राहत मिलेगी।


