श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ: श्राप भी बन सकता है मोक्ष का द्वार, यदि मन में हो भक्ति -भागवताचार्य सुनील शास्त्री
डीग / नीरज जैन 9 मई। डीग के गांव अऊ स्थित श्री गोपाल जी मंदिर में चल रहे श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के दूसरे दिन शनिवार को भागवताचार्य सुनील शास्त्री ने राजा परीक्षित और श्रृंगी ऋषि के श्राप प्रसंग का मार्मिक एवं आध्यात्मिक व्याख्यान प्रस्तुत किया। उन्होंने कथा के माध्यम से बताया कि जीवन में आने वाली विपत्तियां भी मनुष्य को परमात्मा की ओर अग्रसर करने का माध्यम बन सकती हैं।
भागवताचार्य शास्त्री ने कहा कि राजा परीक्षित एक धर्मनिष्ठ और प्रजावत्सल शासक थे, लेकिन क्षणिक क्रोध और असावधानी के कारण उन्होंने तपस्वी ऋषि शमीक के गले में मृत सर्प डाल दिया। इस घटना से आहत होकर उनके पुत्र श्रृंगी ऋषि ने क्रोधवश राजा परीक्षित को सात दिन में तक्षक नाग के दंश से मृत्यु का श्राप दे दिया।
उन्होंने समझाया कि यही श्राप राजा परीक्षित के जीवन का टर्निंग पॉइंट बना। श्राप को भी यदि सकारात्मक दृष्टि से स्वीकार किया जाए, तो वह मोक्ष का मार्ग प्रशस्त कर सकता है। राजा परीक्षित ने शोक या भय में डूबने के बजाय समस्त सांसारिक मोह त्यागकर गंगा तट पर बैठकर भगवान श्रीहरि का स्मरण किया और शुकदेव मुनि से भागवत कथा श्रवण कर मोक्ष को प्राप्त हुए।
शास्त्री ने श्रद्धालुओं को संदेश देते हुए कहा कि क्रोध, अहंकार और अविवेक मनुष्य के पतन का कारण बनते हैं, जबकि सत्संग, संयम और प्रभु भक्ति जीवन को सार्थक बनाते हैं। कथा श्रवण के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु भावविभोर होकर भगवान के नाम का रसपान करते नजर आए।


