ग्राम रथ अभियान: हरगोविन्द के लिए खुशियों की सौगात, मौके पर मिला अपनी जमीन का मालिकाना हक
भरतपुर / कोश्लेंद्र दत्तात्रेय
राजस्थान सरकार का 'ग्राम रथ अभियान' ग्रामीण क्षेत्रों में न केवल योजनाओं का प्रचार-प्रसार कर रहा है, बल्कि मौके पर ही समस्याओं का समाधान कर आमजन के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रहा है। इसी कड़ी में सेवर पंचायत समिति की ग्राम पंचायत घुस्यारी में आयोजित शिविर हरगोविन्द के लिए नई उम्मीदें लेकर आया।
वर्षों का इंतज़ार और बैंक ऋण की समस्या
घुस्यारी निवासी हरगोविन्द पुत्र रविन्द्र सिंह ने बताया कि पट्टा न होने के कारण उन्हें अपनी जमीन पर मालिकाना हक नहीं मिल पा रहा था। सबसे बड़ी समस्या बैंक से ऋण लेने में आ रही थी, जिसके कारण कृषि कार्यों और परिवार की आर्थिक जरूरतों को पूरा करने में वे असमर्थ महसूस कर रहे थे।
शिविर में हाथों-हाथ मिला समाधान
ग्राम रथ अभियान के तहत आयोजित जनजागरूकता शिविर में हरगोविन्द ने उपखंड अधिकारी (SDM) भारती गुप्ता के समक्ष पट्टे के लिए आवेदन किया। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए उपखंड अधिकारी ने मौके पर ही संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया। प्रशासनिक तत्परता का आलम यह रहा कि आवेदन के दस्तावेजों की कमी को शिविर में ही पूरा किया गया और हरगोविन्द को उनके घर/भूमि का स्वामित्व पट्टा सौंप दिया गया।
"पट्टा मिलने से अब मुझे अपनी भूमि पर कानूनी मालिकाना हक मिल गया है। अब मैं बैंक से लोन लेकर खेती और परिवार की जिम्मेदारियों को बेहतर तरीके से पूरा कर सकूँगा। प्रशासन का यह कदम सराहनीय है।"
— हरगोविन्द, लाभार्थी
मुख्यमंत्री और प्रशासन का जताया आभार
स्वामित्व का पट्टा हाथ में आते ही हरगोविन्द के चेहरे पर मुस्कान साफ दिखाई दी। उन्होंने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और जिला प्रशासन का आभार जताते हुए कहा कि जब योजनाएं इस तरह सीधे धरातल पर लागू होती हैं, तभी ग्रामीण क्षेत्रों का वास्तविक विकास संभव है।
क्या है ग्राम रथ अभियान?
अभियान के दौरान एलईडी मोबाइल वैन (ग्राम रथ) के जरिए ग्रामीणों को कृषक कल्याण, पशुपालन और डेयरी जैसी महत्वपूर्ण योजनाओं की जानकारी दी जा रही है। जिला प्रशासन का प्रयास है कि शिविरों के माध्यम से पात्र व्यक्तियों को मौके पर ही लाभान्वित कर सरकारी योजनाओं को 'अंतिम छोर' तक पहुँचाया जाए।


