राष्ट्रीय राजमार्गों पर "रूरल प्रोडक्ट आउटलेट्स" स्थापित करने की मांग: ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगी नई उड़ान
भरतपुर, (विष्णु मित्तल) समृद्ध भारत अभियान के निदेशक सीताराम गुप्ता ने केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गढ़करी को पत्र लिखकर देशभर के एक्सप्रेस-वे, ग्रीन फील्ड कॉरिडोर एवं प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्गों पर विकसित किए जा रहे वे-साइड एमेनिटी एवं विश्राम स्थलों पर “रूरल प्रोडक्ट आउटलेट्स” स्थापित करने की मांग की है।
गुप्ता ने अपने पत्र में कहा कि भारत तेजी से विश्वस्तरीय सड़क अवसंरचना विकसित कर रहा है तथा आधुनिक एक्सप्रेस-वे एवं राष्ट्रीय राजमार्ग केवल यातायात सुविधा ही नहीं बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का भी बड़ा माध्यम बन सकते हैं। यदि हाईवे विश्राम स्थलों पर ग्रामीण एवं स्थानीय उत्पादों के लिए समर्पित “रूरल प्रोडक्ट आउटलेट्स” विकसित किए जाएँ, तो इससे लाखों किसानों, महिला स्वयं सहायता समूहों, ग्रामीण कारीगरों एवं लघु उत्पादकों को सीधा राष्ट्रीय बाजार उपलब्ध होगा।
उन्होंने कहा कि वर्तमान में ग्रामीण क्षेत्रों में हस्तशिल्प, जैविक खाद्य सामग्री, कृषि आधारित उत्पाद, दुग्ध उत्पाद, हथकरघा वस्त्र, मिट्टी एवं लकड़ी के शिल्प, मसाले, शहद, बाजरा उत्पाद, स्थानीय मिठाइयाँ एवं महिला स्वयं सहायता समूहों द्वारा निर्मित वस्तुएँ बड़े स्तर पर तैयार की जाती हैं, लेकिन उचित मार्केटिंग और ब्रांडिंग के अभाव में उत्पादकों को उनकी मेहनत का उचित मूल्य नहीं मिल पाता। कई बार बिचौलियों के कारण किसानों और दस्तकारों की आय सीमित रह जाती है।
गुप्ता ने सुझाव दिया कि प्रत्येक एक्सप्रेस-वे एवं राष्ट्रीय राजमार्ग के विश्राम स्थलों पर स्थानीय जिलों एवं ग्रामीण क्षेत्रों के उत्पादों के लिए विशेष आउटलेट स्थापित किए जाएँ, जहाँ संबंधित जिले के “वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट (ODOP)” एवं पारंपरिक उत्पादों को प्राथमिकता दी जाए। इन आउटलेट्स को आधुनिक डिजाइन, डिजिटल भुगतान, पैकेजिंग, ब्रांडिंग एवं ई-कॉमर्स सुविधाओं से जोड़ा जाए ताकि उत्पाद सीधे यात्रियों एवं पर्यटकों तक पहुँच सकें।
उन्होंने कहा कि देशभर में करोड़ों लोग प्रतिदिन राष्ट्रीय राजमार्गों एवं एक्सप्रेस-वे का उपयोग करते हैं। यदि इन यात्रियों को यात्रा के दौरान स्थानीय ग्रामीण उत्पाद आसानी से उपलब्ध होंगे तो इससे ग्रामीण उत्पादों की मांग में भारी वृद्धि होगी। इससे किसानों एवं ग्रामीण उत्पादकों की आय वर्तमान की तुलना में 3 से 4 गुना तक बढ़ सकती है। विशेष रूप से जैविक कृषि उत्पाद, दुग्ध उत्पाद, हस्तशिल्प एवं पारंपरिक खाद्य वस्तुओं को बड़ा बाजार मिलेगा।
गुप्ता ने कहा कि यह पहल “वोकल फॉर लोकल”, “आत्मनिर्भर भारत”, “मेक इन इंडिया” तथा “वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट (ODOP)” जैसी योजनाओं को भी नई गति प्रदान करेगी। साथ ही यात्रियों को भारत की स्थानीय संस्कृति, पारंपरिक उत्पादों एवं ग्रामीण विरासत से परिचित होने का अवसर मिलेगा। इससे ग्रामीण पर्यटन एवं सांस्कृतिक पहचान को भी बढ़ावा मिलेगा।
उन्होंने सुझाव दिया कि इस योजना को राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन, खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग, किसान उत्पादक संगठन, डेयरी समितियों एवं महिला स्वयं सहायता समूहों के सहयोग से संचालित किया जाए। साथ ही प्रत्येक आउटलेट में स्थानीय युवाओं को रोजगार देकर स्वरोजगार के अवसर बढ़ाए जाएँ।
गुप्ता ने यह भी सुझाव दिया कि प्रत्येक 50 से 80 किलोमीटर पर विकसित हो रहे वे-साइड एमेनिटी सेंटरों में “भारत ग्राम बाजार” अथवा “रूरल इंडिया मार्केट” के नाम से एक समर्पित क्षेत्र विकसित किया जाए, जहाँ स्थानीय कृषि एवं ग्रामीण उत्पादों की स्थायी प्रदर्शनी और बिक्री हो सके।
उन्होंने केंद्रीय मंत्री से आग्रह किया कि देशभर के एक्सप्रेस-वे, ग्रीन फील्ड हाईवे एवं प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्गों पर विकसित विश्राम स्थलों में “रूरल प्रोडक्ट आउटलेट्स” स्थापित करने हेतु एक समर्पित राष्ट्रीय नीति एवं कार्ययोजना तैयार की जाए, जिससे ग्रामीण भारत की अर्थव्यवस्था को नई दिशा, किसानों को बेहतर बाजार और लाखों ग्रामीण परिवारों को स्थायी आय का मजबूत स्रोत प्राप्त हो सके।


