वैदिक मंत्रोच्चार के साथ 108 कलशों व पंचामृत से हुआ भगवान जगन्नाथ का अभिषेक
जगन्नाथ महोत्सव का आगाज: देव स्नान पूर्णिमा पर भगवान का हुआ गणेश रूपी शृंगार, 15 दिन काढ़े व औषधियों से होगा 'ज्वर' का इलाज
राजगढ़ (अलवर/ अनिल गुप्ता) कस्बे के चौपड़ बाजार स्थित ऐतिहासिक जगन्नाथ मंदिर में देव स्नान पूर्णिमा के पावन अवसर पर भगवान जगन्नाथ जी महाराज का भव्य अभिषेक किया गया। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच भगवान का 108 जल कलशों और पंचामृत से अभिषेक किए जाने के साथ ही क्षेत्र में प्रसिद्ध जगन्नाथ महोत्सव का विधिवत आगाज हो गया है। अभिषेक के उपरांत भगवान जगन्नाथ का अत्यंत मनमोहक 'गणेश रूपी' शृंगार किया गया, जिसके दर्शनों के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु उमड़े।
15 दिनों के लिए 'एकांतवास' (गर्भ गृह) में गए भगवान
मान्यता और परंपरा के अनुसार, ज्येष्ठ पूर्णिमा के इस महास्नान के बाद भगवान जगन्नाथ को 'ज्वर' (बुखार) आता है। इस ज्वर पीड़ा से निजात दिलाने के लिए भगवान को 15 दिनों के लिए गर्भ गृह (एकांतवास) में विराजमान कराया गया है। इस अवधि के दौरान भगवान के पट आम भक्तों के लिए बंद रहेंगे और उन्हें केवल विशेष औषधि युक्त काढ़े व जड़ी-बूटियों का भोग लगाकर उनका उपचार किया जाएगा।
15 जुलाई को नेत्रोत्सव और 16 को सजेगा ऐतिहासिक रथ
मंदिर प्रबंधन के अनुसार, पुरी की जगन्नाथ परंपरा के अनुसार इस पवित्र स्नान से भगवान समस्त जीवों का कल्याण करते हैं। अब 15 दिनों के उपचार के बाद आषाढ़ शुक्ल प्रतिपदा (15 जुलाई) को भगवान स्वस्थ होकर गर्भ गृह से बाहर आएंगे और भक्तों को दर्शन देंगे। इसी दिन मंदिर में नेत्रोत्सव, गणेश पूजन व मंदिर मार्जन (सफाई) का कार्यक्रम होगा। इसके अगले दिन 16 जुलाई को भगवान जगन्नाथ जी महाराज चौपड़ बाजार से जानकी मैया को ब्याहने के लिए गरुड़ रूपी भव्य रथ में सवार होकर ऐतिहासिक मेला स्थल गंगा बाग के लिए प्रस्थान करेंगे।


