जिला स्तरीय समारोह में 4 भामाशाहों का हुआ सम्मान, स्कूलों के भौतिक विकास में भामाशाहों की अहम भूमिका
भरतपुर, (कौशलेन्द्र दत्तात्रेय) जिला स्तरीय भामाशाह सम्मान समारोह का आयोजन सोमवार को स्काउट-गाइड सभागार में जिला कलक्टर कमर चौधरी के मुख्य आतिथ्य में आयोजित किया गया। समारोह में राजकीय शिक्षण संस्थानों के विकास में उल्लेखनीय योगदान देने वाले जिले के चार भामाशाहों का प्रतीक चिन्ह, साफा एवं माल्यार्पण कर सम्मान किया गया।
जिला कलक्टर कमर चौधरी ने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में सहयोग करना सबसे बड़ा पुण्य कार्य है। शिक्षा का उजियारा ही समाज को विकास की राह पर आगे बढ़ाता है। उन्होंने कहा कि किसी देश की प्रगति केवल आर्थिक विकास से नहीं, बल्कि उसके नागरिकों की शिक्षा, संस्कार, जागरूकता और सामाजिक चेतना से मापी जाती है। उन्होंने कहा कि विद्यालय केवल भवन नहीं होते, बल्कि वे ऐसे केंद्र होते हैं जहां से भविष्य का निर्माण होता है। इसलिए विद्यालयों का विकास वास्तव में राष्ट्र निर्माण का कार्य है। उन्होंने कहा कि राजकीय विद्यालय समाज के अंतिम व्यक्ति के बच्चों तक शिक्षा, संस्कार तथा रोजगार एवं स्वरोजगार के लिए मार्गदर्शन पहुंचाने का महत्वपूर्ण कार्य कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा शिक्षा के विकास के लिए पर्याप्त बजट उपलब्ध कराया जाता है, लेकिन यदि इसमें भामाशाहों का सहयोग भी मिल जाए तो विद्यालयों में और बेहतर विकास कार्य कराए जा सकते हैं। उन्होंने नागरिकों से स्वप्रेरित होकर भामाशाह के रूप में आगे आने का आव्हान करते हुए कहा कि शिक्षा का दान सबसे बड़ा दान है। आर्थिक सहयोग के साथ विद्यालयों में आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराकर भी समाज के अंतिम छोर पर बैठे बच्चे तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुंचाने में भागीदारी निभाई जा सकती है।
जिला कलक्टर ने सभी भामाशाहों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसे समाजसेवी नई दिशा देने का कार्य करते हैं। उनके सम्मान से अन्य लोग भी प्रेरित होंगे और शिक्षा के क्षेत्र में जनसहभागिता बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में दान, सेवा और परोपकार की परंपरा सदियों पुरानी है। इतिहास में अनेक ऐसे उदाहरण मिलते हैं जब भामाशाहों ने समाज और राष्ट्रहित में अपना सर्वस्व समर्पित कर दिया। आज भी अनेक समाजसेवी शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरण, महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण विकास जैसे क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्य कर रहे हैं।
शिक्षा विभाग के संयुक्त निदेशक दलवीर सिंह ने कहा कि जनसहयोग और प्रशासनिक प्रयासों के समन्वय से शिक्षा के क्षेत्र में अभूतपूर्व परिवर्तन संभव है। उन्होंने सम्मानित भामाशाहों को समाज के लिए प्रेरणास्रोत बताते हुए कहा कि उनके कार्य अन्य लोगों को भी शिक्षा के क्षेत्र में सहयोग करने के लिए प्रेरित करेंगे।
जिला शिक्षा अधिकारी (प्रारंभिक) अतुल चतुर्वेदी ने बताया कि जिले में भामाशाहों द्वारा विद्यालय भवनों के सुदृढ़ीकरण एवं सौंदर्यीकरण के साथ खेल सामग्री और शिक्षण सामग्री उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण सहयोग दिया गया है। उन्होंने कहा कि जिला कलक्टर के नेतृत्व में भामाशाहों के सहयोग से सरकारी विद्यालयों में विकास कार्यों को नई गति मिली है तथा विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षिक वातावरण उपलब्ध हो रहा है। उन्होंने भविष्य में भी शिक्षा के क्षेत्र में जनसहभागिता बढ़ाने और अधिक से अधिक लोगों को विद्यालय विकास अभियान से जोड़ने का आव्हान किया। समारोह में शिक्षा विभाग के सीबीईओ बच्चू सिंह, सतीश कुमार, गिर्राज प्रसाद, स्काउट के गिर्राज गर्ग, सीओ देवेन्द्र मीना, सम्मानित भामाशाह एवं उनके परिजन उपस्थित रहे। संचालन विजय सिंह कुंतल ने किया।
महात्मा गांधी राजकीय विद्यालय रुदावल में 15 लाख रूपये की लागत से कराये गए निर्माण कार्य पर स्वर्गीय मदनलाल गुप्ता के पुत्र सेवानिवृत्त आरएएस अधिकारी विष्णु कुमार गोयल। राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय जहांगीरपुर, नदबई में लगभग 07 लाख रूपये की लागत से कक्षा-कक्षों का निर्माण करवाने पर रामचरन। राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय कमालपुरा, भुसावर में पॉच लाख तीस हजार रूपये की लागत से कक्षा-कक्ष मय बरामदा निर्माण करवाने पर मोहन सिंह। उच्चैन ब्लॉक के विभिन्न स्कूलों की छतों में रिपेयरिंग हेतु एक लाख बारह हजार पाँच सौ रूप्ये की सहायता दिए जाने पर रिखब चंद मित्तल को सम्मानित किया गया। प्रेरक सम्मान से प्रधानाचार्य महात्मा गांधी राजकीय विद्यालय रुदावल राजेन्द्र गुप्ता को सम्मानित किया गया।


