गोरखपुर के जटेपुर में 5.242 हेक्टेयर जमीन पर गहराया विवाद: 800 परिवारों पर बेदखली का साया, डीएम से गुहार
गोरखपुर (उत्तर प्रदेश) शशि जायसवाल । धर्मशाला बाजार स्थित जटेपुर क्षेत्र में 5.242 हेक्टेयर भूमि को लेकर विवाद गहरा गया है। वर्षों से बसे करीब 800 परिवारों ने एक विवादित वरासत आदेश के आधार पर बेदखली की आशंका जताई है। मंगलवार को बड़ी संख्या में स्थानीय निवासियों ने जिलाधिकारी दीपक मीणा के जनता दर्शन में पहुंचकर निष्पक्ष जांच, विवादित आदेश निरस्त करने और तत्काल हस्तक्षेप की मांग की। डीएम ने मामले की गंभीरता को देखते हुए निष्पक्ष जांच के निर्देश दिए हैं।
क्या है विवाद की पूरी वजह?
मोहल्लेवासियों ने बताया कि नायब तहसीलदार (पिपराइच न्यायालय) द्वारा 28 अप्रैल 2026 को खेवट खाता संख्या-1 की 5.242 हेक्टेयर भूमि पर संदिग्ध परिस्थितियों में एक वरासत दर्ज की गई।
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आरोप: निवासियों का कहना है कि इसी वरासत आदेश को हथियार बनाकर विपक्षी पक्ष पूरी आबादी को बेदखल करने की साजिश रच रहा है, जबकि उस भूमि पर उनका कोई वैध अधिकार नहीं है।
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अदालती आदेश का हवाला: इससे पहले नगर मजिस्ट्रेट न्यायालय (वाद संख्या 2505/2023) द्वारा 3 जुलाई 2026 को दिए गए आदेश में भी क्षेत्रवासियों के वर्षों पुराने कब्जे का संज्ञान लिया गया था।
'पीढ़ियों से बसी है आबादी, दे रहे हाउस और वॉटर टैक्स'
स्थानीय लोगों के अनुसार यह कोई खाली जमीन नहीं है, बल्कि कई पीढ़ियों से बसी हुई घनी आबादी है:
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क्षेत्र में लगभग 800 मकान बने हुए हैं।
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निवासी नियमित रूप से नगर निगम को हाउस टैक्स, जलकर और बिजली बिल जमा कर रहे हैं।
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इस क्षेत्र में नगर निगम का पार्क, रैन बसेरा, मेयर कार्यालय और जीडीए (GDA) के आवास भी मौजूद हैं।
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जमींदारी उन्मूलन के समय यह जमीन आबादी मद में छोड़ी गई थी।
पीड़ितों की प्रशासन से प्रमुख मांगें
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28 अप्रैल 2026 को जारी विवादित वरासत आदेश को तत्काल निरस्त किया जाए।
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पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच कराई जाए।
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किसी भी प्रकार की बेदखली की कार्रवाई पर पूरी तरह रोक लगाई जाए।
डीएम दीपक मीणा का आश्वासन
मामले की सुनवाई करते हुए जिलाधिकारी दीपक मीणा ने संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों को मामले की निष्पक्ष जांच कर रिपोर्ट पेश करने के सख्त निर्देश दिए हैं। डीएम ने कहा कि "किसी भी नागरिक के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा और संपूर्ण कार्रवाई विधिक प्रक्रिया के तहत ही होगी।"

