'विकसित भारत' के दावों पर फिरा पानी: PWD की अनदेखी से बदहाल 5 किमी का मार्ग, बारिश में तालाब बनी सड़क
कारोई-सेथुरिया मार्ग की बदहाली से ग्रामीण परेशान: 5 किमी की सड़क में बने गहरे गड्ढे, एंबुलेंस और वाहन चालक हो रहे शिकार
PWD और जनप्रतिनिधियों की अनदेखी का आरोप; स्कूली बच्चों, किसानों और मरीजों की बढ़ी मुश्किलें
गुरला | बद्रीलाल माली
एक तरफ जहां "विकसित भारत" और हर गांव को पक्की सड़क से जोड़ने के बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं, वहीं भीलवाड़ा जिले का कारोई-सेथुरिया मार्ग जमीनी हकीकत की पोल खोल रहा है। लगभग 5 किलोमीटर लंबा यह मार्ग आज डामर की जगह गहरे गड्ढों, कीचड़ और पानी के तालाब में तब्दील हो चुका है। मानसून की बारिश के बाद सड़क की हालत इतनी भयावह हो गई है कि यहाँ से गुजरना किसी जोखिम से कम नहीं है।
पुलिया के पास स्थिति विकट, 1 से 1.5 फीट तक भरा पानी
मौके पर जायजा लेने पर स्थिति बेहद बदतर नजर आई। पुलिया के आसपास लगभग 100 मीटर के दायरे में सड़क पूरी तरह धंस चुकी है और डामर गायब हो चुका है। जल निकासी की व्यवस्था न होने से सड़क पर 1 से 1.5 फीट तक पानी भरा हुआ है, जिससे दोपहिया वाहन चालक लगातार हादसों के शिकार हो रहे हैं।
छात्रों, किसानों और मरीजों पर भारी पड़ रही लापरवाही
- स्कूली बच्चे: सेथुरिया और आसपास के गांवों से कारोई पढ़ने जाने वाले बच्चों की ड्रेस और जूते कीचड़ में खराब हो रहे हैं। कई बार बसें भी इस रास्ते पर आने से मना कर देती हैं।
- किसान: आसपास के 6-7 गांवों के किसान अपने खेतों और मंडियों तक ट्रैक्टर-ट्रॉली ले जाने में डरते हैं। समय पर फसल न पहुंचने से आर्थिक नुकसान हो रहा है।
- आपातकालीन सेवाएं: एंबुलेंस समय पर न पहुंच पाने के कारण मरीजों और गर्भवती महिलाओं की जान पर बन आती है। वाहनों की बार-बार टूट-फूट से ग्रामीणों पर आर्थिक बोझ भी बढ़ रहा है।
"सड़क नहीं, यह मौत को दावत है" — मदन गुर्जर
ग्राम पंचायत सेथुरिया के उप सरपंच मदन गुर्जर ने आक्रोश जताते हुए कहा कि आपातकाल में इस रास्ते से गुजरना असंभव हो जाता है। उन्होंने बताया कि ग्राम पंचायत से लेकर PWD कार्यालय तक कई बार चक्कर लगाए गए, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।
जनप्रतिनिधियों और PWD के खिलाफ आक्रोश
स्थानीय निवासियों का आरोप है कि PWD विभाग हर साल मरम्मत के नाम पर बजट दिखाता है, लेकिन धरातल पर काम शून्य है। चुनाव के समय पक्की सड़क का वादा करने वाले जनप्रतिनिधि जीतने के बाद सुध नहीं ले रहे हैं। आक्रोशित युवाओं का कहना है कि अब भाषण नहीं, धरातल पर चलने योग्य सड़क चाहिए। यदि जल्द ही इस सड़क का निर्माण नहीं कराया गया, तो ग्रामीण बड़ा आंदोलन करने को मजबूर होंगे।

