कष्ट सहकर दूसरों का दुख दूर करना ही सच्चा 'शिवत्व': कोटड़ी चारभुजा मंदिर में शिवमहापुराण कथा पर झूमे श्रद्धालु
स्वयं कष्ट सहकर दूसरों के दुःख दूर करना ही सच्चा 'शिवत्व': पं. विष्णुश्री कृष्णतनय जी महाराज
श्री कोटड़ी चारभुजा मंदिर में आयोजित हरिहर शिवमहापुराण कथा के दूसरे दिन उमड़ी श्रद्धालुओं की भारी भीड़
गुरला | बद्री लाल माली
श्री कोटड़ी चारभुजा मंदिर परिसर में आयोजित भव्य श्री हरिहर शिवमहापुराण कथा महोत्सव के द्वितीय दिवस श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा। कथा व्यास पूज्य पं. विष्णुश्री कृष्णतनय जी महाराज ने भगवान शिव के करुणामय और लोककल्याणकारी स्वरूप का भावपूर्ण वर्णन करते हुए कहा कि "स्वयं कष्ट में रहकर भी दूसरों के दुःख दूर करने का प्रयास करे, वही वास्तव में शिव है।"
कालकूट विषपान है त्याग और सेवा का सर्वोच्च उदाहरण
कथा व्यास ने समुद्र मंथन के प्रसंग का उल्लेख करते हुए बताया कि भगवान शिव ने सदैव संसार के कल्याण के लिए अपने सुखों का त्याग किया। सृष्टि की रक्षा के लिए कालकूट विष का पान करना शिवत्व की पराकाष्ठा है। उन्होंने श्रद्धालुओं को प्रेरित करते हुए कहा कि मानव जीवन में भी वही व्यक्ति शिव तत्व के निकट पहुँच पाता है, जो स्वार्थ से ऊपर उठकर समाज, परिवार और मानवता की सेवा में समर्पित रहता है।
भजनों पर झूमे श्रद्धालु, जयकारों से गूंजा परिसर
महाराज श्री ने स्पष्ट किया कि शिव केवल पूजन के देव नहीं, बल्कि जीवन जीने की सर्वोत्तम प्रेरणा हैं। उनके आदर्शों को अपनाकर ही मनुष्य अपने जीवन को सफल और सार्थक बना सकता है। कथा के दौरान प्रस्तुत मधुर भजनों पर भक्त भाव-विभोर होकर झूमने लगे। पूरा मंदिर परिसर "हर-हर महादेव" और "बोल बम" के गगनभेदी जयघोषों से गुंजायमान हो उठा।
कथा का समापन दिव्य महाआरती और महाप्रसाद वितरण के साथ हुआ। आयोजन समिति ने आगामी दिनों के कथा प्रसंगों में भी अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर धर्म लाभ उठाने का श्रद्धालुओं से आग्रह किया है।

