जिला बनने के ढाई साल बाद भी खैरथल की परिवहन व्यवस्था 'कस्बाई ढर्रे' पर:बसों का ठिकाना तय नहीं: सड़क किनारे लग रहा जाम
खैरथल / हीरालाल भूरानी
खैरथल को जिला मुख्यालय बने ढाई साल से ज्यादा का समय बीत चुका है, लेकिन शहर की परिवहन व्यवस्था अब भी पुराने कस्बाई ढर्रे से बाहर नहीं निकल पाई है। करीब 80 हजार की आबादी वाला यह शहर आज भी एक एकीकृत (केन्द्रीय) बस स्टैंड के लिए तरस रहा है। हालात यह हैं कि यात्रियों को बस पकड़ने के लिए एक स्टैंड से दूसरे स्टैंड तक डेढ़ से दो किलोमीटर भटकना पड़ रहा है। तीन अलग-अलग दिशाओं में बने बस स्टैंड्स के बीच आवाजाही में यात्रियों का समय और पैसा दोनों बर्बाद हो रहे हैं—कई बार तो ऑटो का किराया बस के कुल सफर से भी ज्यादा लग जाता है।
3 दिशाएं, 3 बस स्टैंड... यात्रियों की फजीहत
शहर में नगर परिषद के पीछे बने स्थायी बस स्टैंड से बहरोड़ रूट की बसें संचालित होती हैं। वहीं, किशनगढ़बास रोड स्थित हेमू कॉलोनी (अस्थायी बस स्टैंड) से किशनगढ़बास रूट की बसें मिलती हैं, जबकि मातोर रोड से लोक परिवहन की बसें बानसूर के लिए चलती हैं। नगर परिषद के पीछे वाले स्टैंड को छोड़ दें तो अन्य स्थानों पर यात्रियों के लिए पीने के पानी या बैठने तक की कोई सुविधा नहीं है। लोग सड़क किनारे खड़े होकर बसों का इंतजार करने को मजबूर हैं।
सड़क किनारे खड़ी बसें दे रहीं हादसों को न्योता
अस्थायी बस स्टैंड पर सड़क किनारे बसें खड़ी रहने से दिनभर जाम की स्थिति बनी रहती है, जिससे हादसों का अंदेशा बना रहता है। इस बदहाली के कारण विशेषकर महिला यात्रियों, बुजुर्गों, विद्यार्थियों और नौकरीपेशा लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
7 से घटकर 5 रह गईं बसें, 200 गांवों की बढ़ी परेशानी
खैरथल-मुंडावर-बहरोड़ रूट पर 30 से अधिक स्थायी व अस्थायी स्टॉपेज हैं, जहां से रोजाना 200 से अधिक गांवों के लोग आवाजाही करते हैं। करीब एक साल पहले तक जहां हर 20 मिनट में बस उपलब्ध हो जाती थी, वहीं अब सुबह 8 से शाम 6 बजे के बीच चलने वाली बसों की संख्या 7 से घटकर महज 5 रह गई है। निश्चित समय-सारणी (Time Table) न होने से यात्रियों को डेढ़ से दो घंटे तक बस का इंतजार करना पड़ रहा है।
अधिकारियों का वक्तव्य
"जल्द बढ़ाई जाएगी बसों की संख्या"
"फिलहाल खैरथल-मुंडावर-बहरोड़ रूट पर 5 बसें संचालित की जा रही हैं, जबकि पहले इस रूट पर 7 बसें चलती थीं। आगार में जल्द ही नई बसें शामिल होने की संभावना है, जिसके बाद इस रूट पर बसों के फेरे और संख्या बढ़ा दी जाएगी।"
— मनोज उदावत, यातायात प्रबंधक (कोटपूतली आगार)

