सावधान! सरकारी योजना और कैशबैक के नाम पर साइबर ठगों का नया जाल: डीपफेक वीडियो और +92 नंबरों से खाली हो रहे खाते
डीग / नीरज जैन : 25 अक्टूबर
सोशल मीडिया पर सरकारी योजनाओं और भारी-भरकम कैशबैक के लुभावने विज्ञापनों की आड़ में साइबर ठगी के मामले देश भर में तेजी से पैर पसार रहे हैं। आमजन की गाढ़ी कमाई पर डाका डाल रहे इन शातिर ठगों के नए पैंतरों को देखते हुए राजस्थान पुलिस की साइबर क्राइम शाखा (R4C) ने कड़ा अलर्ट और विस्तृत एडवाइजरी जारी की है।
डीपफेक और एआई का खेल: ऐसे बिछाया जा रहा है जाल
अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस (साइबर क्राइम) वी.के. सिंह ने बताया कि फेसबुक और इंस्टाग्राम जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर फर्जी विज्ञापनों के जरिए वित्तीय धोखाधड़ी का खतरनाक खेल चल रहा है:
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नेताओं के नकली वीडियो: एआई (AI) तकनीक और डीपफेक का इस्तेमाल कर नामचीन राजनीतिक व सार्वजनिक हस्तियों के फर्जी वीडियो बनाए जा रहे हैं, जिनमें वे खुद योजना की घोषणा करते दिखते हैं।
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विदेशी नंबरों से संपर्क (+92 कोड): विज्ञापनों पर क्लिक करते ही पीड़ित को व्हाट्सएप या फर्जी वेबसाइट्स पर री-डायरेक्ट कर दिया जाता है। इसके बाद पाकिस्तान के कंट्री कोड +92 वाले नंबरों से संदेश भेजकर योजना में चयन होने का झांसा दिया जाता है।
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प्रोसेसिंग फीस के नाम पर वसूली: रजिस्ट्रेशन, टैक्स या वेरिफिकेशन फीस के नाम पर किस्तों में बार-बार पैसे ऐंठे जाते हैं।
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कैशबैक और स्पिन-एंड-विन स्कैम: स्क्रैच कार्ड या इनामी खेल का झांसा देकर पीड़ित को यूपीआई कलेक्ट रिक्वेस्ट स्वीकार करने या यूपीआई पिन दर्ज करने को कहा जाता है, जिससे खाता तुरंत साफ हो जाता है।
साइबर पुलिस की गाइडलाइंस: खुद को ऐसे रखें सुरक्षित
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आधिकारिक पुष्टि अनिवार्य: किसी भी सरकारी योजना के विज्ञापन पर भरोसा करने से पहले संबंधित विभाग की आधिकारिक पोर्टल (Website) पर जाकर जांच करें।
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+92 नंबरों से रहें दूर: किसी जनप्रतिनिधि या उनके दफ्तर के नाम से विदेशी नंबरों (+92) से कॉल या मैसेज आए, तो तुरंत संपर्क काटें और उनके आधिकारिक दफ्तर में पुष्टि करें।
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गोल्डन रूल ऑफ UPI: हमेशा याद रखें कि UPI PIN केवल पैसे भेजने (पेमेंट करने) के लिए दर्ज किया जाता है, पैसे प्राप्त करने के लिए नहीं।
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गोपनीय जानकारी न दें: अपने बैंक खाते का विवरण, ओटीपी (OTP), या यूपीआई पिन कभी किसी अज्ञात व्यक्ति से साझा न करें।
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रिपोर्ट और साक्ष्य रखें सुरक्षित: संदिग्ध विज्ञापनों की स्क्रीनशॉट लेकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर तुरंत रिपोर्ट करें।
ठगी का शिकार होने पर तुरंत यहां करें शिकायत
यदि किसी कारणवश आप साइबर धोखाधड़ी का शिकार हो जाते हैं, तो बिना समय गंवाए निम्नलिखित माध्यमों पर सूचना दें:
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हेल्पलाइन नंबर: तुरंत 1930 पर कॉल करें।
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साइबर हेल्पडेस्क: 9256001930 / 9257510100
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राष्ट्रीय पोर्टल:
cybercrime.gov.in पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज करें या नजदीकी साइबर पुलिस थाने से संपर्क करें।

