26 जून आज से आषाढ़ गुप्त नवरात्रि शुरू
लक्ष्मणगढ़ (अलवर) कमलेश जैन
आज 26 जून गुरुवार से आषाढ़ गुप्त नवरात्रि मनाई जा रही है। साधकों द्वारा इस दौरान 9 दिन के उपवास का संकल्प लेते हुए प्रतिपदा से नवमी तक रोज सुबह-शाम मां दुर्गा की आराधना करेंगे। योग शिक्षक पंडित लोकेश कुमार ने बताया कि पंचांग अनुसार, आषाढ़ मास में शुक्ल पक्ष प्रतिपदा से गुप्त नवरात्रि शुरू है। गुप्त नवरात्रि के दौरान अन्य नवरात्रि की तरह ही पूजन करने का विधान है। आषाढ़ मास की गुप्त नवरात्रि तंत्र साधना के लिए बहुत अधिक महत्व रखती है।
आसाढ मास में मनाई जाने वाली गुप्त नवरात्रि इस बार प्रतिपदा आज 26 जून गुरुवार से शुरू जो04 जुलाई शुक्रवार तक रहेगी। गुप्त नवरात्रि में साधक गुप्त साधनाएं करने शमशान व गुप्त स्थान पर जाते हैं। नवरात्रों में लोग अपनी आध्यात्मिक और मानसिक शक्तियों में वृद्धि करने के लिये अनेक प्रकार के उपवास, संयम, नियम, भजन, पूजन योग साधना आदि करते हैं।माघ आषाढ मास की नवरात्रि को गुप्त नवरात्रि कहते हैं, क्योंकि इसमें गुप्त रूप से शिव व शक्ति की उपासना की जाती है। जबकि चैत्र व शारदीय नवरात्रि में सार्वजिनक रूप में माता की भक्ति करने का विधान है । आषाढ़ मास की गुप्त नवरात्रि में जहां वामाचार उपासना की जाती है । वहीं माघ मास की गुप्त नवरात्रि में वामाचार पद्धति को अधिक मान्यता नहीं दी गई है। ग्रंथों के अनुसार माघ मास के शुक्ल पक्ष का भी विशेष महत्व है।
यदि इन गुप्त नवरात्रों में कोई भी भक्त माता दुर्गा की पूजा साधना करता है तो मां उसके जीवन को सफल कर देती हैं । लोभी, कामी, व्यसनी, मांसाहारी अथवा पूजा पाठ नहीं करने वाला भी यदि गुप्त नवरात्रों में माता की पूजा करता है तो उसे जीवन में कुछ और करने की आवश्यकता ही नहीं रहती । इस समय मंत्र साधना कर ले तो उसका भी फल सफलता के रूप में अवश्य ही मिलता है । यही इस गुप्त नवरात्र की महिमा है रोग-दोष व कष्टों के निवारण के लिए गुप्त नवरात्र से बढ़कर कोई साधनाकाल नहीं हैं।

