चीन ने रोकी डीएपी की आपूर्ति, अपनाने होंगे तरल उर्वरक
लक्ष्मणगढ़ (अलवर ) कमलेश जैन
चीन ने डीएपी के भारत को निर्यात करने पर रोक लगा दी है। उपखंड क्षेत्र में भी डीएपी की भारी खपत है। किसान खेतों में इसका काफी मात्रा में प्रयोग करते हैं। हालांकि, अब देश में भी तरल डीएपी का उत्पादन किया जा रहा है। किसान इसके उपभोग के प्रति जागरूक भी होने लगे हैं। सरकार द्वारा नैनो डीएपी के लिए किसानों को पिछले दो तीन वर्षाें से जागरूक भी किया जा रहा है। किसान अगर नैनो डीएपी को पूरी तरह अपना लेंगे तो कोई समस्या नहीं आएगी।
क्षेत्रीय किसान खेतों में रासायनिक उर्वरक भी प्रयोग करते हैं। इनमें यूरिया और डीएपी की खपत जिले में सबसे अधिक है। इन दोनों उर्वरकों का 90 प्रतिशत हिस्सा चीन, रूस आदि देशों से आयात होता है, क्योंकि ये रेअर अर्थ मेग्नेट से बनते हैं जो इन देशों में सबसे अधिक मिलते हैं। विदेशों से जो दानेदार डीएपी आता है और इसकी मांग बुआई के समय रहती है। विदेशों से आयात प्रभावित होने पर क्षेत्र में भी डीएपी की किल्लत हो जाती थी। अब एक बड़े निर्यातक चीन ने भारत को डीएपी देने पर रोक लगा दी है। हालांकि दूसरे देशों से डीएपी आता रहेगा।
सरकार ने उर्वरक क्षेत्र में विदेशों पर निर्भरता कम करने के लिए यूरिया और डीएपी तरह अवस्था में बनाने शुरू कर दिए थे। इन्हें नैनो यूरिया व नैनो डीएपी कहते हैं। किसानों के लिए बाजार में ये दोनों उपलब्ध हैं।
नैनो डीएपी की 50 किलो की बोरी किसानों को एक हजार 350 रुपये में खरीदी जाती है जबकि विदेशों से एक बोरी दो हजार 750 रुपये की पड़ती है। यानि प्रति बोरी सरकार को एक हजार 400 रुपये सब्सिडी देनी पड़ती है। नैनो यूरिया की बोतल 600 रुपये की है। एक बोरी या एक बोतल एक एकड़ भूमि की फसल के लिए पर्याप्त होती है। नैनो यूरिया देश में ही बनता है और हमारा कोई पैसा विदेश नहीं जाता।