जीवन में गुरु नहीं तो जीवन ही शुरू नहीं, मानव जगत के लिए जीवन में गुरू होना आवश्यक

Jul 9, 2025 - 14:15
 0
जीवन में गुरु नहीं तो जीवन ही शुरू नहीं, मानव जगत के लिए जीवन में गुरू होना आवश्यक

जयपुर (कमलेश जैन) जैन धर्म में सच्चे देव शास्त्र गुरू के प्रति अकाट्य श्रद्धा होना ही जैन धर्म का मुख्य उद्देश्य है। सच्चे गुरू यानि बीतरागी सच्चे निग्रन्थ गुरू। गुरू ही हमारे लिए सर्वश्रेष्ठ है। गुरू ही मोक्ष मार्ग बताने वाले हैं। गुरू से ही नर से भगवान बना जाता है। गुरू ही भगवान व सृष्टि से रूबरू कराता है। गुरू ही हमें जीवन जीना सिखाता है। जैसे सूर्य के ताप से तपती भूमि को वर्षा शीतलता मिलती है, फसल पैदा करने की ताकत मिलती है। वैसे ही गुरू चरणों में शिष्यों को ज्ञान, शान्ति, भक्ति और योग शक्ति प्राप्त करने की शक्ति मिलती है।
भारतीय संस्कृति में गुरू का स्थान देवताओं से भी ऊपर माना गया है। कबीर के दोहे से भी स्पष्ट है कि "गुरू गोबिन्द दोनों खडे, काके लागू पाय। बलिहारी गुरू आपने, गोविन्द दियो बताय"।
सही राह दिखाने बाले गुरू हो तो कामयाब होने से कोई नहीं रोक सकता है।
सच्चा गुरू आँखों के सामने सर्वोच्च ब्रह्म है। सच्चे गुरू को मैं श्रद्धा से नमन करता है।
बिना गुरू के आत्मोन्नति भी संभव नहीं है। "बन्दे गुरूणां गुण लब्धये" जिस गुरू में सच्चे गुण है वैसा ही बनने के लिए नमस्कार करता हूँ।
गुरू ही हमारे पूज्य है। गुरूओं ने ही आज मानय जगत के लिए इतने उपकार किये हैं जिनका ऋण चुका नहीं सकते। गुरुओं ने ही हमको हमारे देब व शास्वों के बारे में बताया, गुरुओं ने ही हमारे संस्कारों के साथ मोक्ष मार्ग की ओर अग्रसर किया, यदि हमारे जीवन में गुरू नहीं हों तो जीवन भी शुरू नहीं है। मानव जीवन के लिए सच्चा गुरू होना आवश्यक है सच्चा गुरू यानि सभी बन्धनों से मुक्त हों। गुरू वह है जो जीवन से कैसे जिया जाता है यह सिखता है, गुरू वे होते हैं जो बीतरागी हों, शान्त हों, जिन्हें गर्मी, सर्दी, डांस, मच्छर, कुत्ते, सिंह आदि क्रूर से क्रूर, जन्तुओं का भूख, प्यास आदि का किसी भी प्रकार का शोक, खेद, चिन्ता, न हो, जिन्हें लजा, व ग्लानि के भाव नहीं आते हों, जिन्हे अपने तप, ज्ञान, व प्रतिष्ठा का अभिमान ही ना हो। इस प्रकार चारों कषायों को परास्त कर दिया हो, ऐसे बीतरागी सच्चे गुरु हैं।
 बीतरागी सच्चे गुरू वे हैं जो शान्ति के प्रतीक हैं, कषायों और पांचों इन्द्रियों के विजेता हों, अहिंसा, सत्य, अचीर्य, ब्रह्ममर्च व परिग्रह इन पांचों महाव्रतों से सुशोभित हों।
ईया, भाषा, एषणा, आदान-निश्क्षेपण, व व्युत्सर्ग इन पाँच समिति रूपी कवच को धारण करने बाले हों। समता, बन्दना, स्तुति, प्रतिक्रमण, स्वाध्याय व कायोत्सर्ग ये छः आवश्यक जिनके रक्षक हो। अन्तरंग जीवन हो, केश लोचन, अदन्तपोवन, स्नान रहित हो, एक बार में 24 घन्टे में भोजन खड़े-खडे, हाथ में भोजन तथा भू-श्यन इन सात ब्रह्म गुणों के धारक हों।
28 मूल गुणों सहित जो उत्तम क्षमा, मार्दव, आर्जव, शौच, सत्य, संथम, तप, त्याग, आकिन्वयन, व ब्रह्मचर्य आदि 10 धर्मों के धारण करने वाले हों। इन्हीं गुणों से गुरू सच्चे गुरू हैं। गुरु के उपकारों व महिमा का कोई छोर नहीं है। यह सही है कि मानव जीवन के लिए गुरू परम उपकारी है। इसलिए जीवन में गुरू होना आवश्यक है।
आज भी इस देश में सच्चे निग्रन्ध, बीतरागी गुरुओं की कमी नहीं है। में आज जो गुरु है उनका नाम लेना चाहूँगा और उनके श्री चरणों में नमन करना चाहता हूँ उनमें परम पूज्य चारित्र चक्रवर्ती प्रथमाचार्य श्री शान्तिसागरजी महाराज (दक्षिण), परम पूज्य आचार्य श्री आदि सागरजी महाराज (अंकलीकर), परम पूज्य आचार्य श्री शान्तिसागरजी महाराज (छाणी) परम्परा के परम पूज्य आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज, परम पूज्य आचार्य श्री समय सागर जी महाराज, परमपूज्य आचार्य श्री अनेकान्त सागर जी, आचार्य श्री बसुनन्दी जी महाराज, गणाचार्य श्री कुन्यु सागर जी महाराज, पट्टाचार्य श्री विशुद्ध सागर जी महाराज, आचार्य श्री, पुष्पट्न्तजी महाराज, आचार्य श्री प्रशन्नसागर जी महाराज, आचार्य श्री प्रज्ञासागर जी महाराज, आचार्य श्री पुलक सागर जी महाराज, आचार्य श्री प्रज्ञ सागर जी महाराज, आचार्य श्री सुनील सागर जी महाराज, आचार्य श्री विशदसागर जी महाराज, आचार्य श्री देवनन्दी जी महाराज, आचार्य श्री विहर्श सागर जी महराज, आचार्य श्री चिमर्श सागर जी महाराज, आचार्य श्री ज्ञानभूषण जी महाराज, आचार्य श्री सुन्दर सागरजी महाराज, पट्टाचार्य श्री ज्ञेयसागर जी महाराज, निर्मापक मुनि पुंगव श्री सुधा सागर जी महाराज, उपाध्याय श्री उज्र्ज्यन्त सागर जी महाराज, मुनि श्री प्रमाण सागर जी महाराज, मुनि श्री प्रणम्य सागर जी महाराज, मुनि श्री पावन सागर जी महाराज, मुनि श्री समत्य सागर जी महाराज, मुनि श्री आदित्य सागर जी महाराज, मुनि श्री अमित सागर जी, आदि समस्त आचार्य व मुनि महताज।
परम पूज्य आर्यिका देश की सर्वोच्च साध्वी गणिनी प्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी, आर्यिका श्री चन्दनामती माताजी, श्री स्वस्तिभूषण माताजी, आर्यिका श्री विमलप्रभा माताजी, आर्यिका श्री सृष्टिभूषण माताजी, आर्यिका श्री पूर्णमती माताजी, आर्यिका श्री विज्ञाषी माताजी, आर्यिका श्री आर्षमती माताजी, आर्यिका श्री सुज्ञानमती माताजी, आदि समस्त आचार्य, उपाध्याय, साधु व आर्यिका माताजियों को संघ सहित शत्-शत् नमन करता हूँ, नमोस्तु करता है, बन्दामी करता हूँ। गुरू भक्ति के रूप में गुरुओं के वचनों को घर-घर पहुंचाकर, उनके बताये, निर्देश व शिक्षा की पालना जितना अधिक से अधिक करेंगे ये ही हमारे सच्चे गुरूओं के प्रति सच्ची भक्ती होगी।

बन्धुओं, हमारा यह लेख लिखने का मूल उद्देश्य वे ही है कि आज हम सभी का गौरव है कि हमें आज चलते फिरते तीर्थकरों के रूप में गुरू मिले हैं. इन गुरुओं के बारे में हमारी वर्तमान युवा पीढ़ी इनकी त्याग, तपस्या, संयम को पहचाने और गुरू को समझे और हम सभी को यानि संस्थाओं व समाज को जिन मन्दिरों के पदाधिकारियों को जैन सोशल ग्रुपों को गुरुओं के आहार-विहार में जितना बन सके उससे अधिक करना चाहिये, गुरुओं की वैष्यावृति, सच्चे मन से करना चाहिये। सच्चे गुरू की सच्ची भक्ति करेंगे तो निश्चित रूप से हमारे कर्मों का क्षय होगा और हम गलत रास्ते पर न जाकर सही रास्ते पर जायेंगे। और समाज का उत्थान, विकास होगा और हम मोक्ष मार्ग की ओर अग्रसर होंगे। गुरु पूर्णिमा 10 जुलाई को सम्पूर्ण देश अपने-अपने गुरुओं को श्रद्धा से नमन करेगा। जिन्होंने अभी तक कोई गुरू नहीं बनाया तो वे अवश्य बनाये। चातुर्मास अबधि में, उनके आहार-विहार में सभी को सक्रिय रूप से आगे आकर श्रमण संस्कृति का संरक्षण करें, युवा वर्ग, कलमकार यानि पत्रकार, संपादक, संवाददाता भी गुरुओं के आहार-बिहार में स्थानीय समाज को जगाये और संबंधित थानों में उनके संरक्षण की व्यवस्था कराने में सहयोग करें।

हमारी सभी शीर्ष संस्थाओं को योजनाबद्ध तरीके से इन चल तीर्थों मानि वीतरागी गुरुओं की सुरक्षा पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। पुनः एक बार सभी आचार्यो, उपाध्यायों, मुनियों, व आर्यिकाओं को विस्वभाव से सच्चे मन से नमन करता हूँ।
इन्हीं शुभ मंगलकामनओं के साथ।

like

dislike

love

funny

angry

sad

wow

एक्सप्रेस न्यूज़ डेस्क बुलंद आवाज के साथ निष्पक्ष व निर्भीक खबरे... आपको न्याय दिलाने के लिए आपकी आवाज बनेगी कलम की धार... आप भी अपने आस-पास घटित कोई भी सामाजिक घटना, राजनीतिक खबर हमे हमारी ई मेल आईडी GEXPRESSNEWS54@GMAIL.COM या वाट्सएप न 8094612000 पर भेज सकते है हम हर सम्भव प्रयास करेंगे आपकी खबर हमारे न्यूज पोर्टल पर साझा करें। हमारे चैनल GEXPRESSNEWS से जुड़े रहने के लिए धन्यवाद................