जंगली सूअरों का आतंक, किसान परेशान उपखण्ड अधिकारी को दिया ज्ञापन, मुआवजे की मांग
उदयपुर।(मुकेश मेनारिया) मेहनत से बोई गई मक्का की फसल कटाई से पहले ही जंगली सुअरों के भेंट चढ़ रही है। वल्लभनगर एवं भींडर तहसील के कई गांवों में सुअर दिन व रात खेतों में घुसकर मक्का की फसल को बर्बाद कर रहे हैं। किसान फसल बचाने के लिए तारबंदी, रातभर खेतों में डेरा डालना, डंडे और पटाखों से डराने जैसे हरसंभव प्रयास कर रहे हैं, लेकिन सफलता नहीं मिल रही। वही ग्राम पंचायत धावडीया के किसानों ने भींडर उपखण्ड अधिकारी को ज्ञापन सौंप कर उचित मुआवजे की मांग की है।
इस मौके पर धावडीया ग्राम पंचायत सरपंच प्रतिनिधी कैलाश मीणा, पुर्व सरपंच देवीलाल मीणा सहित कई ग्रामीण उपस्थित रहें।
तारबंदी भी बेअसर, मिट्टी खोदकर घुस रहे सुअर- किसानों ने खेतों की सुरक्षा के लिए कांटेदार तार और झाड़ियां लगाकर तारबंदी की, लेकिन जंगली सुअर जमीन खोदकर खेतों में घुस जाते हैं। कुछ जगह तो खेतों की मेड़ें तक उखड़ चुकी हैं। किसानों का कहना है कि इन जानवरों की संख्या इतनी ज्यादा हो गई है कि इन्हें रोकना नामुमकिन सा हो गया है।
मौसम की मार के बाद नई आफत-पिछले दो महीने से कभी तेज बारिश, कभी सूखे ने किसानों की चिंता बढ़ा रखी थी। अब मक्का के भुट्टे को जंगली सुअरों ने खेतों में आकर उन्हें नष्ट करना शुरू कर दिया। किसानों का कहना है कि प्राकृतिक आपदा और अब यह जंगली संकट उनकी मेहनत को चौपट कर रहा है।
मेहनत हो रही है बर्बाद-किसान रमेश जोशी का कहना है कि हम रोज रात को खेतों में रहते हैं। डंडे, पटाखे सब इस्तेमाल कर चुके, लेकिन सुअर बिना डरे फसल उजाड़ जाते हैं। हमारी मक्का की फसल आधी से ज्यादा बर्बाद हो चुकी है। इसी तरह किसान अमित पानेरी ने बताया कि तारबंदी पर हजारों रुपए खर्च किए, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। अब सरकार ही कोई समाधान करे।
गांव-गांव में दहशत- क्षेत्र के एक दर्जन से अधिक गांवों में किसान एक जैसी समस्या से जूझ रहे हैं। किसानों का कहना है कि रात होते ही झुंड के झुंड जंगली सुअर खेतों में घुस जाते हैं। ग्रामीणों में इतनी दहशत है कि महिलाएं और बच्चे रात के समय खेतों की ओर जाने से डरते हैं। किसानों ने वन विभाग और प्रशासन से इस समस्या के स्थायी समाधान की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि शीघ्र ही कार्रवाई नहीं हुई तो अगले सीजन की फसल बोना भी मुश्किल हो जाएगा।