गोविन्दगढ़ में मनाया गया बाल दिवस: निबन्ध प्रतियोगिता हुई आयोजित, बच्चों ने की रंग-बिरंगी सजावट
"बच्चों को मिले खेलने का अधिकार: लड़का हो या लड़की" - मनोज कुमार
गोविन्दगढ़ उपखंड क्षेत्र स्थित विद्यालयों में आज 14 नवंबर को बाल दिवस बड़ी धूम धाम से मनाया गया। यह आयोजन देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू की जयंती के अवसर पर किया गया। विद्यालय को एक उत्सव के रूप में सजाया गया था। इस दिन को बच्चों के लिए यादगार बनाने हेतु विभिन्न मनोरंजक एवं शिक्षाप्रद प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया | इस दौरान बच्चों में उद्यमिता और रचनात्मकता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से निबन्ध प्रतियोगिता, पोस्टर रंगोली, बाल मेले का आयोजन किया गया, जो मुख्य आकर्षण का केंद्र रहा।
रामबास स्थित MGGS विद्यालय परिसर को रंग-बिरंगी सजावट और गुब्बारों से सजाया गया । शिक्षकों के मार्गदर्शन में विद्यार्थियों ने बच्चों ने चित्रकला, पोस्टर निर्माण और निबंध लेखन जैसी प्रतियोगिताओं में भाग लेकर अपनी रचनात्मकता का प्रदर्शन किया। बच्चो ने हाथ से बने शिल्प, कलाकृतियाँ और मनोरंजक खेल भी उपलब्ध रहे। साथ ही छात्रों ने नृत्य, गायन और लघु नाटिकाओं के माध्यम से अपनी प्रतिभा का परिचय दिया।
वही राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय न्याना में अलवर की इंटेक संस्था द्वारा मांडना और आसन प्रतियोगिता का आयोजन किया गया, इन कार्यक्रमों में छात्रों की उत्साहपूर्ण भागीदारी देखने को मिली, जिसने पूरे वातावरण को ऊर्जा से भर दिया, इन गतिविधि से उन्हें व्यावहारिक जीवन और व्यापार का अनुभव प्राप्त हुआ।
विद्यालय के प्राचार्य मनोज बाली ने बताया कि यह दिन देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू की जयंती के रूप में बाल दिवस के तौर पर मनाया जाता है। उन्होंने कहा कि बच्चों ने अपनी तैयारियों और अन्य गतिविधियों के माध्यम से यह संदेश दिया कि स्वरोजगार से देश का भला हो सकता है। शिक्षिका ने बच्चों को भविष्य में बेहतर प्रदर्शन के लिए आशीर्वाद भी दिया। वर्षभर की विभिन्न गतिविधियों और बाल दिवस पर आयोजित सभी प्रतियोगिताओं के विजेताओं को प्रमाण पत्र और पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया। साथ ही नन्ने मुन्ने बच्चों को टॉफी, चॉकलेट वितरित किए।
"बच्चों को मिले खेलने का अधिकार: लड़का हो या लड़की" - बाली
- इस पखवाड़े का मुख्य उद्देश्य छात्रों के बीच लैंगिक समानता (Gender Equality) और खेल के मौलिक अधिकार के प्रति जागरूकता बढ़ाना है।
- पखवाड़े के दौरान, संवाद सत्रों (Dialogue Sessions), वाद-विवाद प्रतियोगिताओं और नुक्कड़ नाटकों का आयोजन किया गया ताकि लड़के और लड़कियों दोनों के लिए खेल के समान अवसरों पर चर्चा की जा सके।
- यह कार्यक्रम छात्रों को यह समझने में मदद करेगा कि खेल केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि उनका अधिकार है, और इसमें लिंग के आधार पर कोई भेदभाव नहीं होना चाहिए।
- यह पूरा आयोजन विद्यालय के छात्रों के सर्वांगीण विकास (Overall Development) और एक स्वस्थ, समावेशी (Inclusive) वातावरण के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
एक बच्चा सीखता है, जब उसे समझा जाए, और चमकता है, जब उसे सराहा जाए। ‘बच्चों की आंखों में चमक है, जो पूरे समाज को रोशन कर सकती है।’ ‘बच्चों को अपने सपनों को पहचानने की आजादी दें, दुनिया उनकी आंखों से और सुंदर लगेगी।’