गोविंदगढ़ में श्रीमद्भागवत कथा का तीसरा दिन: पंडित नृत्यगोपाल शास्त्री ने युवाओं को भक्ति की प्रेरणा दी, प्रहलाद चरित्र का वर्णन किया
गोविन्दगढ़ (अलवर) के रामबास स्थित श्री कलाधारी मंदिर पर आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन कथा व्यास पं. नृत्यगोपाल शास्त्री ने प्रहलाद चरित्र, सती चरित्र और जड़ भरत संवाद का विस्तृत वर्णन किया। उन्होंने बताया कि भगवान की भक्ति में ही सच्ची शक्ति निहित है और भागवत कथा मनुष्य को सही मार्ग दिखाती है।
शास्त्री ने भक्तों को संबोधित करते हुए कहा- भक्ति ध्रुव और भक्त प्रहलाद जैसी होनी चाहिए। उन्होंने स्मरण कराया कि भगवान ने भक्त प्रहलाद के लिए ही अवतार लेकर हिरण्यकश्यप का वध किया था। उनका संदेश था कि यदि भक्ति सच्ची हो, तो ईश्वरीय शक्ति अवश्य सहायता करती है।
इस मौके पर पं. शास्त्री ने बच्चों को संस्कार देने के महत्व पर जोर दिया ताकि वे बुढ़ापे में अपने माता-पिता की सेवा कर सकें। उन्होंने गो सेवा और साधु सेवा को भी महत्वपूर्ण बताया। शास्त्री ने कहा कि मनुष्य को दिखावा छोड़कर सच्चे हृदय से भगवान को याद करना चाहिए।
उन्होंने आगे कहा कि अहंकार, गर्व, घृणा और ईर्ष्या से मुक्त होने पर ही मनुष्य को ईश्वर की कृपा प्राप्त होती है। यदि हम संसार में पूरी तरह मोहग्रस्त और लिप्त रहते हुए सांसारिक जीवन जीते हैं, तो हमारी सारी भक्ति केवल एक दिखावा ही रह जाएगी।
भागवत कथा में प्रहलाद चरित्र पुत्र और पिता के संबंध को प्रदर्शित करता है। यह प्रसंग बताता है कि सच्चा भक्त विपरीत परिस्थितियों में भी भगवान की भक्ति से विमुख नहीं होता। भयानक राक्षस प्रवृत्ति के हिरण्यकश्यप जैसे पिता को प्राप्त करने के बावजूद भी प्रहलाद ने अपनी ईश्वरीय भक्ति नहीं छोड़ी।
महाराज शास्त्री ने बताया कि मनुष्य जीवन में जाने-अनजाने प्रतिदिन कई पाप होते हैं, जिनका ईश्वर के समक्ष प्रायश्चित करना ही मुक्ति पाने का एकमात्र उपाय है। उन्होंने ईश्वर आराधना के साथ अच्छे कर्म करने का आह्वान किया।
शास्त्री ने बताया कि सत्संग और शास्त्रों में बताए आदर्शों का श्रवण करने में वह शक्ति है जो व्यक्ति के जीवन को बदल देती है। उन्होंने व्यक्तियों को क्रोध, लोभ, मोह, हिंसा और संग्रह का त्याग कर विवेक के साथ श्रेष्ठ कर्म करने की सलाह दी। रविवार, 28 दिसंबर को कथा के दौरान बलि-वामन चरित्र, श्री राम-कृष्ण जन्म और नंदोत्सव का प्रसंग होगा।