टिटपुरी के बेनामी संत आश्रम पर आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में बताया गोर्वधन पूजा का महत्व
कठूमर (दिनेश लेखी)। टिटपुरी मुख्यालय पर स्थित बेनामी संत आश्रम पर चल रही सात दिवसीय भागवत कथा में मंगलवार को पांचवें दिन गोवर्धन पूजा का महत्व बताया तथा नंदोत्सव सहित अनेक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया।
इस मौके पर व्यास राष्ट्रीय क्रांति दल के महाराज श्री गंगागीरी महाराज ने अपने मुखारविद से गोवर्धन पूजा की कथा सुनाते हुए कहाकि विशेष बतौर पर मनुष्यों के द्वारा प्रकृति के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए गोवर्धन का यह पर्व मनाया जाता है। इस दिन गोवर्धन व भगवान कृष्ण के पूजन का विधान है। इस दिन को अन्नकूट पूजा भी कहा जाता है, क्योंकि इस दिन अन्नकूट का भोग लगाने की परंपरा है। इस दिन घर के आंगन में गाय के गोबर से गोवर्धन पर्वत और पशुधन की आकृति बनाई जाती है व विधि-विधान के साथ पूजन किया जाता है। गोवर्धन पूजन की कथा द्वापर युग से जुड़ी हुई है। जब भगवान कृष्ण ने देवराज इंद्र का अहंकार दूर करने के लिए लीला रची थी । तभी से गोवर्धन पूजन की परंपरा आरंभ हुई। इस अवसर पर छप्पन भोग लगाया गया और गोवर्धन की परिक्रमा की गई।
इस दौरान महिलाओं ओर पुरुषों ने भगवान कृष्ण के जन्मोत्सव की खुशी मनाई बेनामी संत आश्रम के महंत श्री शिवचेतन महाराज ने बताया कि बुधवार को कृष्ण और रूक्मणी के विवाह की कथा सुनाई जाएगी।