डिजिटल अरेस्ट के नाम पर ठगी करने वाला शातिर आरोपी गिरफ्तार
अलवर (अनिल गुप्ता) अलवर पुलिस को साइबर अपराध के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत बड़ी सफलता हाथ लगी है। साइबर क्राइम प्रिवेंशन स्क्वाड अलवर ने डिजिटल अरेस्ट के नाम पर लोगों को डराकर ठगी करने वाले एक शातिर आरोपी को गिरफ्तार किया है। आरोपी लंबे समय से आमजन को फोन कॉल के जरिए खुद को सरकारी अधिकारी बताकर मानसिक दबाव में लेकर पैसे ऐंठने का काम कर रहा था।
अलवर पुलिस के अनुसार दिनांक 13 जनवरी 2026 को साइबर सेल को सूचना मिली कि कुछ साइबर ठग आम नागरिकों को कॉल कर खुद को पुलिस, सीबीआई अथवा अन्य जांच एजेंसियों का अधिकारी बताकर डिजिटल अरेस्ट की धमकी दे रहे हैं। ठग पीड़ितों को यह कहकर डराते थे कि उनके खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग या अन्य गंभीर अपराधों में मामला दर्ज है और गिरफ्तारी से बचने के लिए तुरंत पैसे ट्रांसफर करने होंगे।
सूचना के आधार पर तकनीकी विश्लेषण और गोपनीय सूचना के आधार पर कार्रवाई की गई। पुलिस टीम ने कार्रवाई करते हुए आरोपी को चिन्हित किया और उसे हिरासत में लिया। पूछताछ के दौरान आरोपी ने डिजिटल अरेस्ट के नाम पर कई लोगों से ठगी करना स्वीकार किया।
पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी फर्जी सिम कार्ड, अलग-अलग मोबाइल नंबर और डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग कर लोगों को झांसे में लेता था। आरोपी का उद्देश्य लोगों में भय पैदा कर उन्हें मानसिक रूप से तोड़ना और फिर उनसे ऑनलाइन माध्यम से पैसे ट्रांसफर करवाना था।
अलवर पुलिस ने आरोपी के कब्जे से मोबाइल फोन, सिम कार्ड तथा अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त किए हैं, जिनकी तकनीकी जांच की जा रही है। पुलिस को आशंका है कि आरोपी के तार किसी बड़े साइबर ठग गिरोह से भी जुड़े हो सकते हैं। इस दिशा में गहन जांच जारी है। अलवर पुलिस ने आमजन से अपील की है कि किसी भी प्रकार की डिजिटल अरेस्ट, वीडियो कॉल पर गिरफ्तारी या सरकारी एजेंसी बनकर पैसे मांगने वाली कॉल पर विश्वास न करें। पुलिस या कोई भी सरकारी एजेंसी कभी भी फोन या वीडियो कॉल पर गिरफ्तारी नहीं करती। ऐसी किसी भी संदिग्ध कॉल की सूचना तुरंत साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 या नजदीकी पुलिस थाने में दें।