पेशनर्स का हल्ला बोल: वैधता अधिनियम 2025 के विरोध में उपखंड कार्यालय पर प्रदर्शन, ज्ञापन सौंपा
वैर (भरतपुर/ कौशलेन्द्र दत्तात्रेय) भारत सरकार के वित्त मंत्रालय द्वारा पेंशनर्स के विरुद्ध जारी वैद्यता अधिनियन 2025 को वापस लेने की मांग को लेकर बुधवार को पेंशनरों ने उपखंडाधिकारी कार्यालय पर प्रदर्शन किया। उन्होंने उपखंडाधिकारी को अपनी मांग का ज्ञापन भी सौंपा।
पेंशनरों का कहना था कि एक ऐसा अधिनियम, जो इस सिद्धांत को मान्यता देता है, कि केन्द्र सरकार को अपने पेंशनर्स का वर्गीकरण करने और उनके बीच अन्तर बनाये रखने का अधिकार है, 29 नार्च 2025 को जारी नोटीफिकेशन से लागू हो गया है। इसे बिना पूर्व सूचना के वित्त विधेयक के भाग के रूप में पेश किया गया और 25 मार्च 2025 को लोकसभा द्वारा अनुमोदित कर दिया गया है। यदि यह अधिनियम अक्षरशः लागू होता है ,तो पेंशनभोगियों की सेवानिवृत्ति की तिथि, पेंशन पात्रता के संबंध में वर्गीकरण और उनके बीच अन्तर का आधार होगा, जिससे केन्द्रीय वेतन आयोग (या किसी भी वेतन आयोग) के कार्यकाल से पहले के पेंशनर्स वेतन आयोग की सिफारिशों के लाभ से वंचित हो जाएगें। मौजूदा पेंशनभोगियों को इस कठिन समय में पेंशन वृद्धि का लाभ न मिलने के कारण भारी नुकसान उठाना पड़ेगा।
यह सरकार के घोषित उद्देश्यों के विरूद्ध है कि वह अपने सभी नागरिकों को सामाजिक न्याय और सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने का प्रयास करती है। यह भारत के सर्वोच्च न्यायालय के न्यायिक निर्णयों के भी विरूद्ध है। ज्ञापन देने वालों में अध्यक्ष तेजसिंह धाकड़, पुरुषोत्तम शर्मा, घमंडी मीना, मनमोहन शर्मा, वेदप्रकाश दत्तात्रेय, गोपाल शर्मा, मुकेश अग्रवाल,अमर सिंह, महेंद्र सिंह,घीसीराम शर्मा, रामप्रसाद शर्मा,निर्मल सैनी आदि मौजूद रहे।