सेवा का सम्मान ही सौभाग्य का उदय; गोवत्स राधाकृष्ण भागवत समरसता महोत्सव में दूसरे दिन उमड़ा जनसैलाब
भीलवाड़ा, (कौशलेन्द्र दत्तात्रेय) नोगांवा सांवरिया सेठ पावन धाम में आयोजित श्रीमद् भागवत समरसता महोत्सव के दूसरे दिन श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। कथा के दौरान जोधपुर के गोवत्स संत श्री राधाकृष्ण महाराज ने कहा कि सेवादारों का सम्मान करना केवल सद्गुण नहीं, बल्कि जीवन में सौभाग्य जगाने का सरल मार्ग है। जो लोग निस्वार्थ भाव से समाज की रक्षा और सेवा करते हैं, उनके प्रति सम्मान प्रकृति की दृष्टि में पुण्य का कार्य है। प्रकृति हर गतिविधि का लेखा-जोखा रखती है और उसके नियमों का अनादर करने वालों को वह अपना ‘जुर्माना’ अवश्य देती है।
महाराज जी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष का उल्लेख करते हुए कहा कि संघ की सेवा पद्धति वर्षों के अनुभव और अनुशासन से जन्मी है। उन्होंने समझाया कि जिस प्रकार पूजा की थाली पवित्र होती है, उसी प्रकार हाथ में झाड़ू लेकर समाज को स्वच्छ रखने वाला व्यक्ति भी माँ भारती की पूजा कर रहा होता है। झाड़ू को उन्होंने ‘लक्ष्मी’ का प्रतीक बताते हुए कहा कि इसे सम्मानपूर्वक व्यवस्थित रखना संस्कृति का हिस्सा है। इसके आदर से प्रकृति ऐसे सहायक भेजती है, जो जीवनभर सुरक्षा देते हैं।
कथा से पूर्व उपनगर पुर से संत श्री की अगुवाई में निकली प्रभातफेरी में भक्तों ने हरि-नाम के उद्घोष से पूरे वातावरण को भक्तिमय कर दिया। सफाईकर्मियों और राहगीरों ने मार्ग में संत श्री का आशीर्वाद लिया। दूसरी ओर संस्थान की रसायनशाला में लगी छायाचित्र प्रदर्शनी श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र बनी रही, जिसमें गो-संरक्षण और मंदिर निर्माण की 23 वर्षों की यात्रा का सुंदर चित्रण किया गया। कथा स्थल पर पेयजल, सुरक्षा और यातायात के प्रभावी प्रबंध किए गए तथा रामधाम से निशुल्क बस सेवा भी संचालित की गई। कथा का संचालन पंडित अशोक व्यास ने किया।
कथा के दौरान पूर्व सांसद सुभाष बहेडिया, डॉ. ऋतु बनावत, उद्योगपति बनवारीलाल मुरारका, सत्यप्रकाश गगड़, नवीन मूंदड़ा सहित अनेक गणमान्य जनों और गौ-भक्तों ने संत श्री का वंदन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। उधर शहर के कुमुद विहार में आयोजित भजन संध्या में गोवत्स संत राधाकृष्ण महाराज के भजनों पर भक्त देर तक झूमते रहे। मातृशक्ति के नृत्य ने भक्ति का वातावरण और भी मधुर बना दिया।
महोत्सव के आगामी कार्यक्रमों के अनुसार 29 मार्च को प्रह्लाद चरित्र एवं नृसिंह अवतार की कथा होगी। 30 मार्च को कृष्ण जन्मोत्सव एवं रामस्नेही वाटिका में युवा गोष्ठी आयोजित की जाएगी। 31 मार्च को बाल कृष्ण लीला, छप्पन भोग, समरसता भोज तथा कोठारी पैलेस में सुंदरकांड पाठ होगा। 1 अप्रैल को रुक्मणी विवाह तथा 2 अप्रैल को सुदामा चरित्र के साथ महोत्सव का समापन किया जाएगा। समरसता, सेवा और अध्यात्म से सराबोर यह महोत्सव श्रद्धालुओं को निरंतर आध्यात्मिक ऊर्जा प्रदान कर रहा है।