झील केला देवी मेले में अव्यवस्था! देवस्थान विभाग की मनमानी से दुकानदार और श्रद्धालु नाराज़
भरतपुर, (कौशलेन्द्र दत्तात्रेय) प्रसिद्ध आस्थाधाम श्री कैला देवी झील का बाड़ा लक्खी मेले से इस वक्त एक बड़ी और चिंताजनक खबर सामने आ रही है। देवस्थान विभाग की कथित लापरवाही और कुप्रबंधन के चलते स्थानीय दुकानदारों और दूर-दराज से आए हजारों श्रद्धालुओं में भारी आक्रोश व्याप्त है। आस्था के इस केंद्र पर अब भ्रष्टाचार और व्यवस्थाओं के नाम पर खिलवाड़ के गंभीर आरोप लग रहे हैं।
- दुकान माफियाओं का बोलबाला, छोटे व्यापारी बाहर
प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस बार मेले में दुकानों का आवंटन सीधे 'दुकान माफियाओं' को कर दिया गया है। आरोप है कि इन माफियाओं ने दुकानदारों से मनमाना और अत्यधिक शुल्क वसूला है, जिसके चलते पिछले कई दशकों से दुकान लगाने वाले पुराने और छोटे व्यापारियों ने इस बार मेले से दूरी बना ली है। मेले के ग्राउंड में कई स्थान खाली पड़े हैं, जिससे मेले की पारंपरिक रौनक गायब नजर आ रही है।
- सुविधाओं का भारी अभाव: न खाना, न पानी
मेले में आने वाले श्रद्धालुओं की स्थिति और भी बदतर है। विभाग की कुव्यवस्था का आलम यह है कि पूरे मेला परिसर में एक भी भोजन का होटल सुचारू रूप से संचालित नहीं हो पा रहा है। पीने के पानी की समुचित व्यवस्था न होने के कारण इस भीषण गर्मी में यात्री और मासूम बच्चे भूखे-प्यासे भटकने को मजबूर हैं। श्रद्धालुओं का कहना है कि बुनियादी सुविधाओं के अभाव में उनकी आस्था और श्रद्धा अब कष्ट में बदल गई है।
- प्रशासनिक चुप्पी पर उठे सवाल
दुकानदारों का सीधा आरोप है कि देवस्थान विभाग ने बिना किसी पूर्व सूचना के किराया बढ़ाकर छोटे व्यापारियों पर आर्थिक बोझ डाल दिया है। स्थानीय लोगों और व्यापारियों में बढ़ती नाराजगी के बाद अब जिला प्रशासन से तुरंत हस्तक्षेप और समाधान की मांग की जा रही है।
मुख्य मांगें:
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दुकान आवंटन में हुई धांधली की निष्पक्ष जांच हो।
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श्रद्धालुओं के लिए तत्काल पेयजल और भोजन की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
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छोटे व्यापारियों को राहत देते हुए उचित दर पर स्थान उपलब्ध कराया जाए।
अब देखना यह होगा कि देवस्थान विभाग इस गंभीर लापरवाही पर क्या कदम उठाता है या फिर यह ऐतिहासिक लक्खी मेला विभागीय उदासीनता की भेंट चढ़ जाएगा।