भागवत रसधारा से सराबोर समरसता महोत्सव—जहाँ भक्ति बनी औषधि और जीवन बना उत्सव
भीलवाड़ा (बृजेश शर्मा) परम पूज्य माधव गो विज्ञान अनुसंधान संस्थान एवं श्री सांवरिया सेठ मंदिर ट्रस्ट नौगांवा के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित भागवत समरसता महोत्सव अपने पांचवें दिन उस आध्यात्मिक उत्कर्ष पर पहुँच गया जहाँ हर क्षण, हर श्वास, हर भाव भक्ति के रंग में रंगा दिखाई दिया। ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो कथा स्थल नहीं, स्वयं गोकुलधाम धरा पर अवतरित हो गया हो। परम पूज्य गौवत्स राधाकृष्ण महाराज ने अपने ओजस्वी और हृदयस्पर्शी प्रवचन में कहा कि जीवन की नीरसता ही डिप्रेशन का कारण है और इस अवसाद का समाधान केवल भागवत की रसधारा में ही संभव है। महाराज श्री ने वर्तमान समय में बढ़ते मानसिक दबावों पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि मनुष्य ज्ञान तो बहुत संग्रहित कर रहा है, पर उसे आचरण में उतारने का भाव खोता जा रहा है। जैसे जेब में रखी दवा रोग नहीं हर सकती, ठीक वैसे ही केवल ग्रंथों की बातें याद रखने से जीवन का कल्याण नहीं होता—सच्चा लाभ तभी है जब ज्ञान जीवन की दिनचर्या में सहज प्रवाहित हो।
सुबह दूधाधारी मंदिर से निकली प्रभातफेरी ने शहर को भक्ति की ज्योति से जगाया। महाराज श्री ने कहा कि प्रभातफेरी जिस प्रकार गलियों से गुजरी, वह दृश्य ऐसा था मानो हर रास्ते से गंगा मैया स्वयं प्रवाहित हो रही हों। उन्होंने इस आध्यात्मिक यात्रा को गिरिराज तीर्थ यात्रा के समान पुण्य फलदायी बताते हुए कहा कि मेरे सांवरिया सेठ का सच्चा धाम भक्तों के हृदय और वृंदावन की कुंज गलियों में ही बसता है, जहाँ निष्कपट प्रेम का निवास है। प्रवचन के दौरान महाराज श्री ने सोशल मीडिया पर भी चुटीला कटाक्ष किया और कहा कि आजकल लोग संतों के विचारों को स्टेटस पर तो लगा लेते हैं, लेकिन उन विचारों को अपने जीवन का स्टेटस नहीं बना पाते। धर्म दूसरों को दिखाने की वस्तु नहीं, बल्कि स्वयं के भीतर रोशनी भरने का माध्यम है।
उन्होंने सहज जीवन और संतोष को ही वास्तविक सुख बताते हुए कहा कि बारिश के मौसम में घर की छत पर बैठकर गरमा-गरम पकौड़े खाने का जो आनंद है, वह बंद कमरे के एयर कंडीशनर में कभी नहीं मिल सकता। जीवन की सरलता ही सबसे बड़ा सुख है, क्योंकि नैसर्गिकता में ही आनंद का वास्तविक बीज छिपा है। शाम को रामसनेही वाटिका में आयोजित युवा गोष्ठी में महाराज श्री ने युवाओं की जिज्ञासाओं का समाधान करते हुए मातृभाषा की महत्ता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि जड़ों की भाषा ही सीधे हृदय तक पहुँचती है और चरित्र निर्माण में सबसे बड़ा योगदान देती है। इस अवसर पर उन्होंने भगवान महावीर जन्मोत्सव की शुभकामनाएँ देते हुए अहिंसा, अपरिग्रह और संयम को जीवन का आधार बनाने का संदेश दिया।
कथा पंडाल में समाज के विभिन्न वर्गों की उपस्थिति ने समरसता की अनूठी मिसाल प्रस्तुत की। जिला पुलिस अधीक्षक धर्मेंद्र यादव सहित अनेक गणमान्य जनों ने महाराज श्री का पूजन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। समरसता भोज में सैकड़ों परिवारों ने अपने घरों से लापसी और प्रसाद सामग्री लाकर यह संदेश दिया कि एकता का वास्तविक स्वरूप भोजन और भक्ति दोनों में समान भागीदारी से ही साकार होता है। शाम को कोठारी पैलेस, पुर में 108 बार हनुमान चालीसा पाठ ने पूरे वातावरण को हनुमानमय कर दिया।
संस्थान अध्यक्ष डी.पी. अग्रवाल एवं कथा संयोजक मनीष बहेडिया ने बताया कि गुरुवार को सुदामा चरित्र की कथा के साथ इस भव्य महोत्सव का समापन होगा। पंडित अशोक व्यास कथा का संचालन कर रहे हैं और प्रतिदिन रामधाम से बस सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है, ताकि अधिक से अधिक श्रद्धालु कथा रसधारा का लाभ ले सकें। रसायनशाला में लगी प्रदर्शनी भी श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित कर रही है जहाँ वे अध्यात्म, संस्कार और विज्ञान के समन्वय को अनुभव कर रहे हैं। महोत्सव का संपूर्ण वातावरण भक्ति, समरसता, प्रेम और जीवन दर्शन से इस कदर सराबोर है कि हर आगंतुक अपने भीतर एक नई ऊर्जा, नई रोशनी और नया कल लेकर लौट रहा है।