तेल के बाद दुनिया पर मंडराया इंटरनेट संकट, भारत सहित दुनिया के कई देशो का बंद हो सकता है इंटरनेट

Apr 1, 2026 - 17:31
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तेल के बाद दुनिया पर मंडराया इंटरनेट संकट, भारत सहित दुनिया के कई देशो का बंद हो सकता है इंटरनेट

दुनिया में चल रहे भू-राजनीतिक तनाव का असर अब सिर्फ तेल और गैस तक सीमित नहीं रहा है। अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते टकराव ने एक नए खतरे को जन्म दिया है—इंटरनेट संकट। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर होर्मुज स्ट्रेट में हालात बिगड़ते हैं, तो पूरी दुनिया में इंटरनेट सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं। यह स्थिति भारत के लिए भी गंभीर चिंता का विषय बन सकती है।
क्या है स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और क्यों है इतना अहम? स्ट्रेट ऑफ होर्मुज मध्य पूर्व का एक बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है, जहां से दुनिया का लगभग 20% कच्चा तेल और 25% एलएनजी गुजरती है। यही कारण है कि इसे “एनर्जी चोकपॉइंट” कहा जाता है।लेकिन अब यह इलाका “डिजिटल चोकपॉइंट” भी बन चुका है, क्योंकि समुद्र के नीचे से गुजरने वाली कई महत्वपूर्ण इंटरनेट केबल्स इसी क्षेत्र से होकर गुजरती हैं।
समुद्र के नीचे चलता है इंटरनेट, सैटेलाइट नहीं अक्सर लोगों को लगता है कि इंटरनेट सैटेलाइट के जरिए चलता है, लेकिन वास्तविकता इससे अलग है। दुनिया का करीब 95 से 97 प्रतिशत डेटा फाइबर ऑप्टिक केबल्स के माध्यम से ट्रांसफर होता है, जो समुद्र के नीचे बिछी होती हैं। ये केबल्स बेहद हाई-स्पीड डेटा ट्रांसफर करती हैं और वैश्विक इंटरनेट नेटवर्क की रीढ़ मानी जाती हैं।
कौन-कौन सी केबल्स हैं महत्वपूर्ण?
भारत को यूरोप, अफ्रीका और पश्चिम एशिया से जोड़ने वाली कई प्रमुख केबल्स इसी क्षेत्र के पास से गुजरती हैं। इनमें प्रमुख हैं—

  • SEA-ME-WE (South East Asia – Middle East – Western Europe)
  • AAE-1 (Asia Africa Europe-1)
  • EIG (Europe India Gateway) इन केबल्स के जरिए ही भारत का अधिकांश इंटरनेशनल डेटा ट्रैफिक संचालित होता है।

भारत पर क्या होगा असर?

अगर होर्मुज क्षेत्र में तनाव के कारण केबल्स को नुकसान पहुंचता है, तो भारत पर इसका सीधा असर देखने को मिलेगा। 1. इंटरनेट स्पीड हो सकती है धीमी यूट्यूब, इंस्टाग्राम, फेसबुक और नेटफ्लिक्स जैसे प्लेटफॉर्म पर वीडियो देखने में बफरिंग बढ़ सकती है। 2. लेटेंसी बढ़ेगी डेटा को लंबा रास्ता तय करना पड़ेगा, जिससे वेबसाइट्स और ऐप्स खुलने में ज्यादा समय लगेगा। 3. वीडियो कॉल और ऑनलाइन काम प्रभावित Zoom, Google Meet और अन्य ऑनलाइन सेवाओं में रुकावट आ सकती है, जिससे वर्क फ्रॉम होम और ऑनलाइन क्लासेस प्रभावित होंगी।
IT सेक्टर को हो सकता है बड़ा नुकसान 
भारत का IT और आउटसोर्सिंग सेक्टर लगभग 250 बिलियन डॉलर का है। यह सेक्टर अमेरिका और यूरोप के क्लाइंट्स पर निर्भर करता है, जहां रियल-टाइम डेटा एक्सचेंज बेहद जरूरी होता है। अगर इंटरनेट स्लो या बाधित होता है: कंपनियों के सर्विस एग्रीमेंट टूट सकते हैं। भारी पेनाल्टी लग सकती है। क्लाइंट्स का भरोसा कम हो सकता है
बैंकिंग और रेमिटेंस पर भी असर 
खाड़ी देशों से भारत में आने वाला पैसा (रेमिटेंस) और अंतरराष्ट्रीय बैंकिंग सिस्टम जैसे SWIFT भी इन इंटरनेट केबल्स पर निर्भर हैं। अगर नेटवर्क प्रभावित होता है, तो: पैसे ट्रांसफर में देरी हो सकती है, बैंकिंग सेवाएं धीमी पड़ सकती हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि पूरी तरह इंटरनेट बंद होना मुश्किल है, क्योंकि दुनिया में कई वैकल्पिक रूट्स मौजूद हैं। हालांकि, अगर होर्मुज क्षेत्र में केबल्स को नुकसान होता है, तो: इंटरनेट स्पीड काफी धीमी हो सकती है। नेटवर्क पर दबाव बढ़ सकता है। कुछ सेवाएं अस्थायी रूप से बाधित हो सकती हैं
सरकार और कंपनियां क्या कर रही हैं तैयारी? ऐसे संकट से निपटने के लिए सरकार और टेलीकॉम कंपनियां बैकअप रूट्स और सैटेलाइट इंटरनेट जैसी तकनीकों पर काम कर रही हैं। इसके अलावा, डेटा ट्रैफिक को डायवर्ट करने के लिए वैकल्पिक समुद्री मार्ग भी तैयार किए जा रहे हैं।
डिजिटल दुनिया के लिए नया खतरा 
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज अब केवल तेल और गैस का मार्ग नहीं, बल्कि डिजिटल दुनिया की लाइफलाइन बन चुका है। यहां किसी भी प्रकार का तनाव या नुकसान पूरे वैश्विक इंटरनेट सिस्टम को प्रभावित कर सकता है। भारत जैसे तेजी से डिजिटल हो रहे देश के लिए यह एक बड़ा खतरा है। ऐसे में जरूरी है कि सरकार और टेक कंपनियां समय रहते तैयारी करें, ताकि किसी भी आपात स्थिति में नुकसान को कम किया जा सके।

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