रूपा रेल नदी के पुनर्जीवन की कवायद: ड्रोन सर्वे पूरा, अब अतिक्रमणकारियों पर चलेगा प्रशासन का डंडा
लक्ष्मणगढ़ (अलवर/कमलेश जैन): लक्ष्मणगढ़ क्षेत्र की जीवनदायिनी मानी जाने वाली रूपा रेल नदी और घाट कैनाल के दिन अब बहुरने वाले हैं। सिंचाई विभाग ने नदी के पुनरुद्धार की दिशा में ठोस कदम उठाते हुए 1.45 करोड़ रुपये की लागत से ड्रोन सर्वे का कार्य पूर्ण कर लिया है। सर्वे रिपोर्ट के आधार पर अब बहाव क्षेत्र से अवैध अतिक्रमण हटाने और नदी के मूल स्वरूप को बहाल करने की तैयारी शुरू कर दी गई है।
- डीपीआर पर मंथन: 10 दिन में तैयार होगी फाइनल रिपोर्ट
नदी के पुनर्जीवन को लेकर तैयार की गई विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) पर जल्द ही अलवर जिला प्रशासन सहित सिंचाई, कृषि, वन, उद्यान, पंचायती राज और भूजल विभाग के अधिकारी चर्चा करेंगे। बैठक में आने वाले सुझावों और आपत्तियों के आधार पर अगले 10 दिनों में संशोधित फाइनल डीपीआर तैयार कर राज्य सरकार को स्वीकृति हेतु भेजी जाएगी।
सर्वे में चौंकाने वाले खुलासे: क्यों रुक रहा है पानी? - छह महीने तक चले इस गहन सर्वे में नदी के प्रवाह में बाधा डालने वाले कई प्रमुख कारण सामने आए हैं:
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अवैध अतिक्रमण: नदी के बहाव क्षेत्र और रास्तों पर बड़े पैमाने पर कब्जे।
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बजरी खनन: अवैध खनन के कारण बने गहरे गड्ढों में पानी का जमा हो जाना।
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संकुचन: बहाव क्षेत्र का सिकुड़ना और जगह-जगह बने अनधिकृत छोटे बांध।
केंद्रीय मंत्री की पहल पर जागी उम्मीद
उल्लेखनीय है कि लक्ष्मणगढ़ के जागरूक नागरिकों (चंद्रशेखर दीक्षित, अभिराम दीक्षित, गंगा लहरी प्रजापत, असलम खान आदि) के एक प्रतिनिधिमंडल ने दिल्ली जाकर केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र सिंह यादव को अतिक्रमण की समस्या से अवगत कराया था। मंत्री के हस्तक्षेप और विभागीय सक्रियता के बाद अब अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की खबर से कृषक वर्ग में हर्ष की लहर है और उन्होंने केंद्रीय मंत्री का आभार व्यक्त किया है।
विशेष टीम करेगी भौतिक सत्यापन
सिंचाई विभाग जल्द ही एक विशेष टीम का गठन करेगा, जो सर्वे में चिन्हित किए गए अतिक्रमण स्थलों का भौतिक सत्यापन करेगी। अवैध कब्जाधारियों को नोटिस जारी करने के बाद जिला प्रशासन के सहयोग से हटाने की सख्त कार्रवाई की जाएगी।
भूजल स्तर में होगा सुधार
अधिकारियों का मानना है कि यदि सीकरी (डीग) तक के लंबे बहाव क्षेत्र को साफ कर दिया गया, तो मानसून के दौरान पानी का प्रवाह सुचारू होगा। इससे न केवल लक्ष्मणगढ़ बांध को पानी मिलेगा, बल्कि समूचे क्षेत्र के भूजल स्तर (Groundwater Level) में भी भारी सुधार होगा, जिससे किसानों को सीधा लाभ मिलेगा।


