विधायक दीपचंद खैरिया ने उठाई RGHS लाभार्थियों की आवाज; मुख्यमंत्री को पत्र लिख निजी अस्पतालों में कैशलेस इलाज बहाल करने की मांग की, बोले -लोगों का प्रीमियम कट रहा, फिर भी नहीं मिल रही सुविधा
राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (RGHS) के तहत निजी अस्पतालों में कैशलेस इलाज ठप हो गया है। अस्पतालों को भुगतान लंबित होने के कारण कई निजी संस्थानों ने योजना के मरीजों का उपचार रोक दिया है। इससे राज्य कर्मचारियों, पेंशनभोगियों और उनके परिवारों के सामने बड़ा स्वास्थ्य संकट खड़ा हो गया है। राज्यभर में हजारों लाभार्थी इलाज, दवाइयों और नियमित स्वास्थ्य सेवाओं के लिए परेशान हो रहे हैं।
- विधायक दीपचंद खैरिया ने मुख्यमंत्री को लिखा पत्र
किशनगढ़बास विधायक दीपचंद खैरिया ने इस मामले को लेकर मुख्यमंत्री को पत्र भेजा है। उन्होंने RGHS योजना को तुरंत सुचारू करने और निजी अस्पतालों में कैशलेस इलाज दोबारा शुरू करवाने की मांग की है।
विधायक ने कहा कि पिछले करीब एक महीने से कई निजी अस्पताल RGHS कार्डधारकों का इलाज नहीं कर रहे हैं, जिससे बड़ी संख्या में कर्मचारी और पेंशनभोगी प्रभावित हैं।
- प्रीमियम कट रहा, फिर भी इलाज बंद
पत्र में विधायक ने उल्लेख किया कि सरकारी कर्मचारी नियमित रूप से योजना का प्रीमियम जमा कर रहे हैं। इसके बावजूद अस्पतालों को समय पर भुगतान नहीं मिल रहा है।
भुगतान में देरी के चलते निजी अस्पतालों ने सामूहिक रूप से RGHS योजना के तहत कैशलेस इलाज बंद कर दिया है। इससे मरीजों को जेब से पैसा खर्च कर इलाज करवाना पड़ रहा है या उपचार टालना पड़ रहा है।
- गंभीर मरीजों के सामने बढ़ी परेशानी
RGHS सेवाएं बंद होने से सबसे ज्यादा परेशानी गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों को हो रही है। कई मरीजों की सर्जरी, जांच और इलाज प्रभावित हो रहे हैं। ऐसे परिवार, जो पूरी तरह इस योजना पर निर्भर थे, अब आर्थिक और मानसिक दबाव का सामना कर रहे हैं।
- लंबित भुगतान जारी करने की मांग
विधायक दीपचंद खैरिया ने सरकार से मांग की है कि निजी अस्पतालों का लंबित भुगतान तुरंत जारी किया जाए, ताकि योजना के तहत कैशलेस उपचार फिर से शुरू हो सके। उन्होंने यह भी कहा कि जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए और भविष्य में भुगतान में देरी रोकने के लिए स्थायी व्यवस्था बनाई जाए।
- बुजुर्गों के लिए फोटो प्रक्रिया आसान करने की मांग
विधायक ने पेंशनभोगियों और बुजुर्ग लाभार्थियों की परेशानियों का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि नियमित दवाइयां लेने वाले बुजुर्गों को बार-बार अस्पताल जाकर फोटो सत्यापन प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। यह प्रक्रिया बुजुर्गों के लिए कठिन और असुविधाजनक है। इसे सरल और सुविधाजनक बनाने की जरूरत है।
RGHS योजना बाधित होने से राज्य कर्मचारियों, पेंशनभोगियों और उनके परिवारों में चिंता का माहौल है। अब सभी की नजरें राज्य सरकार के अगले फैसले पर टिकी हैं कि प्रभावित लोगों को राहत कब तक मिलती है।


