खेतों के बीच शराब के ठेके बने चिंता का कारण; समरसेबल की केबल चोरी, किसानों की सुरक्षा और ऑर्गेनिक खेती पर मंडराया संकट
लक्ष्मणगढ़ (अलवर/कमलेश जैन) क्षेत्र सहित ग्रामीण इलाकों में खेतों के आसपास संचालित शराब के ठेके अब किसानों के लिए बड़ी परेशानी और चिंता का विषय बनते जा रहे हैं। जागरूक राम मिश्रा ग्रामीणों और किसानों का आरोप है। कि इन ठेकों के आसपास खुले में शराब पीने का चलन बढ़ गया है, जिसके कारण खेतों में शराब की खाली बोतलें, पॉलिथीन, पानी की बोतलें और नमकीन रैपर वअन्य कचरा फेंका जा रहा है। इससे न केवल पर्यावरण प्रदूषित हो रहा है, बल्कि किसानों की मेहनत और खेती की व्यवस्था भी प्रभावित हो रही है।
किसानों का कहना है कि खेतों में फैली गंदगी से पशुओं को नुकसान पहुंचने का खतरा बढ़ गया है। वहीं ऑर्गेनिक खेती करने वाले किसानों के लिए यह स्थिति और भी गंभीर बनती जा रही है, क्योंकि प्लास्टिक और शराब की बोतलों से खेतों की स्वच्छता और मिट्टी की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। ग्रामीणों का मानना है कि यदि यही स्थिति रही तो भविष्य में जैविक खेती पर भी संकट खड़ा हो सकता है।
ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि पिछले कुछ समय से खेतों में लगे समरसेबल पंपों की बिजली के तार काटकर चोरी करने की घटनाएं बढ़ रही हैं। मोटर के उपकरण और अन्य कृषि सामान चोरी होना भी आम घटनाएं, पूर्व में भी घट चुकी है। किसानों के अनुसार कॉपर के तार काटकर बेचने और उससे नशा करने जैसी घटनाएं गांवों में अपराध को बढ़ावा दे रही हैं।
किसानों का कहना है कि मेहनतकश अन्नदाता दिन-रात खेतों में मेहनत करता है, लेकिन अब उसे अपनी फसल के साथ-साथ अपनी सुरक्षा की भी चिंता सताने लगी है। ग्रामीणों ने प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि खुले में शराब पीने और बढ़ती चोरी की घटनाओं पर प्रभावी कार्रवाई नहीं होने से लोगों में आक्रोश बढ़ रहा है।
जागरूक नवयुवकों ग्रामीणों ने किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि खेतों और आबादी क्षेत्र के पास खुले शराब ठेकों की समीक्षा की जाए, खुले में शराब पीने वालों पर कार्रवाई हो तथा किसानों की सुरक्षा के लिए नियमित पुलिस गश्त बढ़ाई जाए। किसान जिस खेत से देश का पेट भरते हैं, उन्हें नशे और अपराध से सुरक्षित रखना सरकार और समाज दोनों की जिम्मेदारी है।


