ग्रामीण सेवा शिविर बने मददगार: स्वामित्व योजना से मिला मालिकाना हक, अब लोन लेना हुआ आसान
भरतपुर, (कौशलेन्द्र दत्तात्रेय) राज्य सरकार द्वारा चलाए जा रहे जन कल्याण शिविरों के अंतर्गत आयोजित 'ग्रामीण सेवा शिविर' आमजन के लिए वरदान साबित हो रहे हैं। जिला प्रशासन के सहयोग से आयोजित इन शिविरों में ग्रामीणों की समस्याओं का मौके पर ही निस्तारण कर उन्हें विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं से लाभान्वित किया जा रहा है। सोमवार को जिले की दो अलग-अलग पंचायत समितियों में 'स्वामित्व योजना' के तहत दो परिवारों के जीवन में बड़ा और सकारात्मक बदलाव देखने को मिला।
केस 1: धौरमई में मुकेश कुमार को मौके पर मिला पट्टा
पंचायत समिति सेवर की ग्राम पंचायत धौरमई में आयोजित शिविर के दौरान ग्रामीण मुकेश कुमार पुत्र करकल्ली ने अपनी समस्या उपखंड अधिकारी (SDM) भारती गुप्ता के सामने रखी। मुकेश ने बताया कि जमीन का स्वामित्व पट्टा न होने के कारण बैंक उन्हें ऋण देने से इनकार कर रहा था, जिससे उनके कृषि कार्य रुके हुए थे। एसडीएम भारती गुप्ता ने मामले की गंभीरता को देखते हुए मौके पर ही संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए। त्वरित कार्रवाई करते हुए मुकेश के सभी जरूरी दस्तावेजों को पूरा करवाकर उन्हें स्वामित्व पट्टा सौंप दिया गया। पट्टा मिलते ही मुकेश के चेहरे पर खुशी की लहर दौड़ गई।
केस 2: भुसावर के वबेखर में इन्द्रा की समस्या का हुआ समाधान
इसी तरह का एक अन्य मामला पंचायत समिति भुसावर की ग्राम पंचायत वबेखर में सामने आया। यहाँ की निवासी इन्द्रा पत्नी लखन भी लंबे समय से भूमि का पट्टा न होने के कारण बैंक लोन के लिए परेशान थीं। शिविर में मौजूद उपखंड अधिकारी (SDM) राधेश्याम मीणा को जब इन्द्रा ने अपनी व्यथा सुनाई, तो उन्होंने तुरंत अधिकारियों को मौके पर ही समाधान के निर्देश दिए। प्रशासन ने सभी औपचारिकताएं पूरी करवाकर इन्द्रा को स्वामित्व पट्टा सौंप दिया।
इन ग्रामीण सेवा शिविरों में 22 अलग-अलग विभागों के आला अधिकारी एक ही छत के नीचे मौजूद रहे। अधिकारियों ने ग्रामीणों को सरकार की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी दी और पात्र लोगों के आवेदन मौके पर ही स्वीकार किए।
मुख्यमंत्री व जिला प्रशासन का जताया आभार
स्वामित्व पट्टा मिलने के बाद दोनों लाभार्थियों (मुकेश कुमार और इन्द्रा) ने माननीय मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा एवं भरतपुर जिला प्रशासन का दिल से आभार व्यक्त किया। लाभार्थियों का कहना था कि यह शिविर गांव-गांव तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाने का सबसे सशक्त माध्यम हैं, जो ग्रामीणों के जीवन में आत्मनिर्भरता और खुशहाली की नई राह खोल रहे हैं। अब पट्टा मिलने के बाद वे आसानी से बैंक ऋण के लिए आवेदन कर सकेंगे, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होगी।


