भरतपुर, (कौशलेन्द्र दत्तात्रेय) राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देशानुसार एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष बलजीत सिंह के मार्गदर्शन में मंगलवार को जिले के विभिन्न सरकारी एवं गैर-सरकारी विद्यालयों में ट्रांसफॉर्मेटिव ट्यूजडे अभियान के तहत विशेष विधिक जागरूकता शिविरों का आयोजन किया गया। शिविरों में कक्षा 9 से 12वीं तक के विद्यार्थियों को शोषण के खिलाफ आवाज उठाओ, स्वयं अपने रक्षक बनो, गुड टच-बैड टच में फर्क समझो और सुरक्षित रहो सहित सशक्त युवा-सशक्त भारत अभियान के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी दी गई।
सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण नवीन कुमार किलानिया द्वारा सनातन विद्यालय में विधिक जागरूकता शिविर आयोजित किया गया। उन्होंने विद्यार्थियों को गुड टच-बैड टच की पहचान, बाल अधिकार एवं बच्चों की सुरक्षा से जुड़े कानूनी प्रावधानों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंनेे विद्यार्थियों को बालक-बालिकाओं के अधिकार, उनकी सुरक्षा तथा कानून के विभिन्न प्रावधानों की जानकारी देते हुए कहा कि वर्तमान समय में विद्यार्थियों के लिए सामान्य शिक्षा के साथ-साथ अपने कानूनी अधिकारों और कर्तव्यों की जानकारी होना भी अत्यंत आवश्यक है। जागरूकता ही बच्चों को शोषण, अपराध और अन्य सामाजिक कुरीतियों से बचाने का महत्वपूर्ण माध्यम है। ट्रांसफॉर्मेटिव ट्यूजडे अभियान के माध्यम से विद्यालयों में 30 से 60 मिनट की अवधि के विधिक जागरूकता शिविर आयोजित कर विद्यार्थियों को कानून, अधिकार एवं सुरक्षा के प्रति जागरूक किया जा रहा है।
- पोक्सो से लेकर चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 तक समझाए सुरक्षा के उपाय-
शिविर में विद्यार्थियों को पोक्सो अधिनियम, 2012, किशोर न्याय अधिनियम, 2015, भारतीय न्याय संहिता, 2023, बच्चों के खिलाफ अपराधों की रोकथाम एवं त्वरित जांच, एंटी-रैगिंग कानून, निःशुल्क विधिक सहायता, बाल विवाह के दुष्परिणाम तथा राजस्थान पीड़ित प्रतिकर स्कीम के बारे में जानकारी प्रदान की गई। विद्यार्थियों को चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर 1098 के बारे में बताते हुए समझाया गया कि किसी भी प्रकार के शोषण, हिंसा, उत्पीड़न अथवा संकट की स्थिति में चुप न रहें और समय पर सहायता प्राप्त करें।
- इलेक्ट्रॉनिक संसाधनों और डेटा सुरक्षा के प्रति भी किया जागरूक-
अभियान के तहत आयोजित शिविरों में विद्यार्थियों एवं शिक्षकों को दैनिक जीवन में उपयोग किए जाने वाले मोबाइल, इंटरनेट एवं अन्य इलेक्ट्रॉनिक संसाधनों के सुरक्षित उपयोग तथा डेटा सुरक्षा के संबंध में भी जागरूक किया गया। विद्यार्थियों को साइबर दुनिया में अपनी व्यक्तिगत जानकारी, फोटो, पासवर्ड एवं अन्य संवेदनशील डेटा की सुरक्षा के प्रति सावधान रहने के लिए प्रेरित किया गया। कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को सशक्त युवा-सशक्त भारत की भावना से जोड़ते हुए अपने अधिकारों के प्रति जागरूक, जिम्मेदार एवं आत्मविश्वासी बनने का संदेश दिया गया। न्यायिक अधिकारियों ने विद्यार्थियों की जिज्ञासाओं एवं समस्याओं को सुना तथा उनके प्रश्नों का समाधान भी किया।