लैंगिक हिंसा पीड़ित बच्चों की मदद के लिए नियुक्त होंगे सपोर्ट पर्सन: बाल अधिकारिता विभाग ने मांगे आवेदन
लैंगिक हिंसा से पीड़ित बच्चों के सहयोग एवं केस प्रबंधन के लिए नियुक्त होंगे 'सपोर्ट पर्सन', बाल अधिकारिता विभाग ने आमंत्रित किए आवेदन
भरतपुर (कोशलेन्द्र दत्तात्रेय)17 अगस्त। जिले में लैंगिक हिंसा से पीड़ित बालक-बालिकाओं एवं उनके परिवारों को न्याय दिलाने और पूरे ट्रायल के दौरान संबल प्रदान करने के लिए बाल अधिकारिता विभाग ने बड़ा कदम उठाया है। जिला बाल संरक्षण इकाई एवं बाल अधिकारिता विभाग, भरतपुर द्वारा लैंगिक हिंसा से पीड़ित बच्चों के बेहतर केस प्रबंधन और सहयोग के लिए 'सपोर्ट पर्सन' नियुक्त किए जाने हेतु आवेदन पत्र आमंत्रित किए गए हैं।
क्या होगी सपोर्ट पर्सन की भूमिका?
सहायक निदेशक (जिला बाल संरक्षण इकाई) ने बताया कि सपोर्ट पर्सन का मुख्य दायित्व पोक्सो एक्ट (POCSO Act, 2012) एवं किशोर न्याय अधिनियम (JJ Act, 2015) के तहत पीड़ित बच्चों को न्याय प्रणाली के हर स्तर पर अनुकूल व सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना होगा।
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समन्वय और मध्यस्थता: सपोर्ट पर्सन पीड़ित बच्चे, उसके परिवार और विभिन्न कानूनी/न्यायिक प्राधिकारियों के बीच एक मजबूत कड़ी के रूप में काम करेंगे।
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संवेदनशील प्रबंधन: न्यायिक प्रक्रिया के दौरान बच्चे को मानसिक तनाव से बचाते हुए केस का प्रभावी व बाल-अनुकूल प्रबंधन सुनिश्चित करेंगे।
???? आवश्यक योग्यता और पात्रता शर्तें
सपोर्ट पर्सन पद के लिए निम्नलिखित योग्यताएं निर्धारित की गई हैं:
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शैक्षणिक योग्यता: किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से सामाजिक कार्य (BSW/MSW), समाजशास्त्र, मानव विकास, मनोविज्ञान अथवा बाल मनोविज्ञान में स्नातकोत्तर (Master's Degree) उपाधि।
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अनुभव: बाल संरक्षण के क्षेत्र में न्यूनतम 5 वर्ष का कार्य अनुभव अनिवार्य।
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विशेष प्राथमिकता: बाल मनोविज्ञान या बाल संरक्षण में डिप्लोमा/सर्टिफिकेट धारक सामाजिक कार्यकर्ताओं को चयन में प्राथमिकता मिलेगी।
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मूल निवास: आवेदक का राजस्थान राज्य का मूल निवासी होना अनिवार्य है।
आवेदन एवं संपर्क की जानकारी
इच्छुक एवं पात्र अभ्यर्थी आवेदन तथा पात्रता से जुड़ी विस्तृत जानकारी प्राप्त करने के लिए:
संपर्क पता:
सहायक निदेशक, जिला बाल संरक्षण इकाई एवं बाल अधिकारिता विभाग,
261, राजेन्द्र नगर, भरतपुर (राजस्थान)।

