बाजारों में छाई रंग-बिरंगी राखियों की रौनक; पौराणिक कथाओं और सनातन परंपराओं के साथ मनाया गया रक्षाबंधन का पवित्र पर्व
राजगढ़ (अलवर / अनिल कुमार गुप्ता)
राजगढ़ कस्बे सहित आसपास के समस्त ग्रामीण इलाकों में भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा का प्रतीक रक्षाबंधन पर्व बड़े ही हर्षोल्लास और आत्मीयता के साथ मनाया गया। सावन मास की पूर्णिमा के पावन अवसर पर बहनों ने अपने भाइयों के माथे पर तिलक लगाकर कलाई पर रक्षासूत्र बांधा और उनके सुखी, स्वस्थ एवं दीर्घायु जीवन की कामना की। वहीं भाइयों ने भी बहनों को उपहार भेंट कर जीवनभर हर परिस्थिति में साथ निभाने और रक्षा करने का वचन दिया।
बाजारों में छाई रंग-बिरंगी रंगत
त्योहार को लेकर राजगढ़ के बाजारों में पिछले कई दिनों से गजब की चहल-पहल देखी गई। मिठाइयों, रोली-अक्षत और उपहारों की दुकानों पर खरीदारों की भारी भीड़ उमड़ी। आधुनिक दौर में राखियों के ट्रेंड में बदलाव देखने को मिला; जहाँ पारंपरिक मौली और रेशमी धागों के साथ-साथ बच्चों के लिए कार्टून पात्रों और बड़ों के लिए आकर्षक धार्मिक प्रतीकों वाली फैंसी राखियों की जमकर बिक्री हुई।
पौराणिक मान्यताओं से जुड़ा पर्व
रक्षाबंधन का यह पर्व केवल कलाई पर धागा बांधने तक सीमित न रहकर प्रेम, विश्वास, जिम्मेदारी और पारिवारिक एकता का प्रतीक है। इस अवसर पर देवी लक्ष्मी व राजा बलि तथा भगवान श्रीकृष्ण व द्रौपदी से जुड़े पौराणिक प्रसंगों को याद किया गया, जो इस त्योहार को समर्पण और अटूट विश्वास की डोर से जोड़ते हैं।
दिनभर घरों में पकवानों की मिठास और हंसी-खुशी का माहौल बना रहा। भाइयों ने अपनी बहनों को मनपसंद उपहार भेंट कर उनके सुख-दुख में सदैव ढाल बनकर खड़े रहने का संकल्प दोहराया।

