जर्मनी से आए प्रतिनिधिमंडल ने लुपिन वेलफेयर द्वारा संचालित योजनाओं का किया निरीक्षण
अलवर (अनिल कुमार गुप्ता) लुपिन ह्यूमन वेलफेयर एंड रिसर्च फाउंडेशन द्वारा संचालित 'कृषि आधारित आजीविका सशक्तिकरण परियोजना' के अंतर्गत आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में जर्मनी से आए प्रतिनिधिमंडल ने भाग लिया। इस दौरान जर्मनी के पर्यावरण मंत्री कार्स्टन के नेतृत्व में आए दल ने परियोजना की विभिन्न गतिविधियों और किसान प्रदर्शन स्थलों का प्रत्यक्ष अवलोकन किया।
कार्यक्रम में जर्मन दूतावास से श्रीमती टाइना और डॉ. अलेहेन्द्रो के साथ-साथ श्रीमती तुषारा शंकर, योगेश राउत, कुंदन बर्नवाल और सौरभ बाबू की गरिमामयी मौजूदगी रही।
नुक्कड़ नाटक से हुई जागरूकता की शुरुआत कार्यक्रम का शुभारंभ एक प्रभावशाली नुक्कड़ नाटक के माध्यम से हुआ। इस नाटक के जरिए उपस्थित किसानों और स्थानीय समुदाय को वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों, प्राकृतिक संसाधनों के कुशल उपयोग तथा सतत आजीविका के तरीकों के प्रति जागरूक किया गया।
बरखेड़ा गांव में देखा आधुनिक पशुपालन व चारा प्रबंधन इसके बाद प्रतिनिधिमंडल ने बरखेड़ा गांव का दौरा कर तीन किसानों के प्रदर्शन स्थलों का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने निम्नलिखित आधुनिक तकनीकों और सुविधाओं का जायजा लिया:
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पशुधन प्रबंधन: आयरन शेड, उचित फर्श व जल निकासी, कैटल मैट, नांद, नियमित टीकाकरण, मिनरल मिक्सचर, पशु स्वास्थ्य शिविर और बीमा व्यवस्था।
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उन्नत तकनीक: BAIF के सहयोग से सेक्स-सॉर्टेड कृत्रिम गर्भाधान।
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चारा व अपशिष्ट प्रबंधन: चारा कटर, साइलेज, हरा चारा, नेपियर और अजोला आधारित चारा प्रबंधन तथा वर्मीकम्पोस्ट द्वारा जैविक कचरा प्रबंधन।
द्विपक्षीय सहयोग की सराहना प्रतिनिधिमंडल ने इंडो-जर्मन द्विपक्षीय सहयोग के तहत कृषि, पशुपालन, जल प्रबंधन और बाजार संपर्क (मार्केट लिंकेज) को एकीकृत रूप से आगे बढ़ाने के लुपिन फाउंडेशन के प्रयासों की भरपूर सराहना की।
टिकाऊ आय का दिया संदेश कार्यक्रम के अंत में यह मुख्य संदेश उभर कर सामने आया कि केवल उत्पादन बढ़ाना ही काफी नहीं है; बल्कि स्वस्थ मिट्टी, कुशल जल प्रबंधन, बेहतर पशु स्वास्थ्य और मजबूत बाजार संपर्क के जरिए ही किसानों की आय को दीर्घकालिक व टिकाऊ बनाया जा सकता है।

