कजरी तीज की धूम: महिलाओं ने झूला झूलकर गाए लोकगीत, निमड़ी व तलाई पूजन कर मांगा अखंड सुहाग
खेड़ापा में कजरी तीज का उल्लास: महिलाओं ने झूलों का लिया आनंद, निमड़ी व तलाई पूजन के बाद चंद्रमा को दिया अर्घ्य
बावड़ी/खेड़ापा (जोधपुर) मिश्रीलाल लखारा। बावड़ी, खेड़ापा कस्बे एवं आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में सोमवार को भाद्रपद कृष्ण पक्ष की कजरी तीज (सातुड़ी तीज) पारंपरिक श्रद्धा, भक्ति और हर्षोल्लास के साथ मनाई गई। सुहागिन महिलाओं ने अखंड सौभाग्य और कुंआरी युवतियों ने सुयोग्य वर की कामना के लिए दिनभर निर्जला व्रत रखा।
सोलह श्रृंगार और नीम पूजन तीज पर्व पर महिलाओं व युवतियों ने सोलह श्रृंगार कर तीज माता की पूजा-अर्चना की। मारवाड़ की प्राचीन परंपरा के अनुसार महिलाओं ने निमड़ी (नीम के पौधे) का पूजन कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। दोपहर बाद तीजणियों ने बागों और आंगनों में झूले झूलते हुए पारंपरिक कजरी व मारवाड़ी लोकगीत गाकर पर्व का जश्न मनाया।
तलाई और नीम के प्रतिबिंब के दर्शन रात के समय व्रती महिलाओं ने सांकेतिक मिट्टी की तलाई बनाई और उसमें जल भरकर जल में नीम, नींबू, सत्तू, काचरा, लाल चुनरी व मोतियों की माला के प्रतिबिंब के दर्शन किए। "तलाई में निमड़ी दिखी..." के पारंपरिक लोक उच्चारणों के साथ कथा सुनी गई और माता रानी को सत्तू का भोग अर्पित किया गया।
16 तीजणियों को दिया सत्तू तीज का उद्यापन करने वाली महिलाओं ने परंपरा का निर्वहन करते हुए 16 तीजणियों को चने, चावल और जौ के आटे से बना सत्तू भेंट कर उनसे अखंड सुहाग का आशीर्वाद लिया।
चंद्रदर्शन के साथ किया पारणा अनुकूल मौसम के चलते रात लगभग 9:15 बजे चंद्रमा के दर्शन होते ही महिलाओं ने चंद्रमा को अर्घ्य देकर अपना व्रत पूरा किया और परिवार की सुख-समृद्धि की प्रार्थना की। इस अवसर पर पुष्पा लखारा, माया लखारा, मोनिका, संतोष, पूजा, रेखा देवड़ा, मानसी, किरण कुरडिया, मंजू झाला, संगीता, रवीना झाला, मनीषा और सुशीला प्रजापत सहित कई महिलाएं उपस्थित रहीं।

