भाजपा की ओर से डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी के बलिदान दिवस और आपातकाल (काला दिवस) की जिला स्तरीय संगोष्ठी हुई आयोजित
सिरोही (रमेश सुथार)
जिला भाजपा की ओर से डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी के बलिदान दिवस और आपातकाल (काला दिवस) की जिला स्तरीय संगोष्टी बैठक भाजपा जिलाध्यक्ष डॉ रक्षा भंडारी की अध्यक्षता में आयोजित की गई। जिसमे राजस्थान सरकार के जनजाति क्षेत्रीय विकास मंत्री बाबूलाल खराड़ी व मुख्य वक्ता रानीवाड़ा पूर्व विधायक नारायणसिंह देवल का आतिथ्य एवं पंचायतीराज राज्यमंत्री ओटाराम देवासी, सांसद लूंबाराम चौधरी, विधायक समाराम गरासिया, जिला प्रमुख अर्जुनराम पुरोहित, पूर्व विधायक जगसीराम कोली का सानिध्य रहा। कार्यक्रम की शुरूआत भारत माता, पंडित दीनदयाल उपाध्याय व डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी के चित्र पर माल्यार्पण व दीप प्रज्ज्वलित कर उनके आदर्शों पर चलने का संकल्प लेकर की गई।
केबिनेट मंत्री बाबूलाल खराड़ी ने सम्बोधित करते हुए कहा कि आज भारत के लोकतांत्रिक इतिहास के सबसे काले अध्यायों में से एक, आपातकाल लागू होने के पचास साल पूरे हो गए हैं।
कोई भी भारतीय कभी नहीं भूल पाएगा कि किस तरह हमारे संविधान की भावना का उल्लंघन किया गया, संसद की आवाज़ दबा दी गई और अदालतों को नियंत्रित करने का प्रयास किया गया। उन्होंने कहा कि गरीबों, हाशिए पर पड़े लोगों और दलितों को खास तौर पर निशाना बनाया गया, जिसमें उनकी गरिमा का अपमान भी शामिल है।
मंत्री बाबूलाल खराड़ी ने कहा कि एक निशान एक संविधान और एक प्रधान का नारा डॉ. श्याम प्रसाद मुखर्जी ने दिया। डॉ मुखर्जी हमेशा जम्मू-कश्मीर को भारत का पूर्ण और अभिन्न अंग मानते थे। यहां तक की डॉ मुखर्जी ने जम्मू-कश्मीर में धारा 370 को समाप्त करने के लिए सबसे पहले आवाज उठाई थी। यहां तक की उन्होंने एक रैली में संकल्प लिया कि वो देश के लोगों को संविधान के नीचे लाएंगे या अपना बलिदान देंगे।
राज्यमंत्री ओटाराम देवासी ने कहा कि 25 जून संविधान हत्या दिवस के रूप में मनाया जाता है एक ऐसा दिन जब मौलिक अधिकारों को निलंबित कर दिया गया था, प्रेस की स्वतंत्रता को खत्म कर दिया गया था और अनगिनत राजनीतिक नेताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं, छात्रों और आम नागरिकों को जेल में डाल दिया गया था। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की गलत नीतियों के कारण आपातकाल का काला दिन भारतीयों को देखना पड़ा।
सांसद लुम्बाराम चौधरी व मुख्य वक्ता रानीवाड़ा पूर्व विधायक नारायणसिंह देवल ने कहा कि कांग्रेस सरकार की पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने जब सत्ता डगमगाई, तो संविधान को कुचल दिया, अपने भविष्य के लिए, पूरे देश का वर्तमान बंधक बना लिया। लोकतंत्र की हत्या कर, अभिव्यक्ति को कैद किया और देश पर तानाशाही का अंधेरा थोप दिया। उन्होंने कहा कि 25 जून 1975 का वो काला दिन जब 'मैं' का अहंकार, 'हम' की आजादी पर भारी पड़ा।
भाजपा जिलाध्यक्ष रक्षा भंड़ारी ने कहा कि आपातकाल के खिलाफ लड़ाई में डटे रहने वाले हर व्यक्ति को सलाम करते हैं सिरोही जिले से भी लोगो ने आपातकाल में जेल के अंदर यातनाएं झेली। देश के लोगो का सामूहिक संघर्ष ही था जिसने सुनिश्चित किया कि तत्कालीन कांग्रेस सरकार को लोकतंत्र बहाल करना पड़ा और नए चुनाव कराने पड़े, जिसमें वे बुरी तरह हार गए।
भाजपा जिला प्रवक्ता रोहित खत्री ने बताया कि आपातकाल के दौरान सिरोही जिले से आपातकाल में यातनाएं झेलने वाले लोगों को भाजपा की ओर से सम्मान किया गया। जिसमे करणसिंह ने आपातकाल के दौरन हुई पीड़ा को साझा किया।
विधायक समाराम गरासिया, जिला प्रमुख अर्जुनराम पुरोहित, पूर्व विधायक जगसीराम कोली, भाजपा पूर्व जिलाध्यक्ष कमलेश दवे, सुरेश कोठारी ने आपातकाल संगोष्ठी पर अपने विचार साझा किए।
इस कार्यक्रम के आपातकाल संगोष्ठी के जिला संयोजक डायालाल दवे ने मंच संचालन किया व सहसंयोजक रतनलाल गरासिया ने सभी का आभार व्यक्त किया।
भाजपा जिला प्रवक्ता रोहित खत्री ने बताया कि इस मौके पर सिरोही प्रधान हँसमुख मेघवाल, रेवदर प्रधान राधिका देवासी, भाजपा वरिष्ठ नेता बाबूभाई पटेल, भाजपा जिला महामंत्री नरपतसिंह राणावत, भाजपा के जनप्रतिनिधि, जिला पदाधिकारी, मंडल अध्यक्ष मंडल व मंडल पदाधिकारी, मोर्चा के जिलाध्यक्ष व पदाधिकारी, आपातकाल संगोष्ठी के मंडल संयोजक व सहसंयोजक सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ता मौजूद थे।


