सत्य की साधना जीवन को सरल, सहज और सौम्य बनाती है= आचार्य विनीत सागर महाराज
डीग (नीरज जैन)1 सितंबर। दशलक्षण महापर्व के पावन अवसर पर पांचवे दिन डीग के तीनों दिगंबर जैन मंदिरों में श्रद्धालुओं ने आत्मशुद्धि और धर्म साधना के भावों के साथ सामूहिक अभिषेक और पूजा एवं शांति धारा कर आत्मकल्याण तथा विश्व शांति की मंगल कामना की।
श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर में आयोजित धर्मसभा में आचार्य विनीत सागर महाराज ने प्रवचन करते हुए उत्तम सत्य धर्म की व्याख्या की। उन्होंने कहा कि सत्य केवल वाणी तक सीमित नहीं है,न बल्कि विचार, आचरण और व्यवहार में सत्य का पालन ही वास्तविक धर्म है। असत्य और कपट मनुष्य को दुःख, भय और अशांति की ओर ले जाते हैं, जबकि सत्य का मार्ग आत्मा को निर्मल और शांत बनाता है।
आचार्य श्री ने बताया कि सत्य की साधना जीवन को सरल, सहज और सौम्य बनाती है। सत्य बोलने वाला व्यक्ति न केवल स्वयं के लिए, बल्कि समाज के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बनता है। उन्होंने कहा कि दशलक्षण महापर्व का प्रत्येक दिन साधक को अपने भीतर छिपी कमजोरियों को पहचानकर उन्हें दूर करने का अवसर देता है। आज के दिन हमें यह संकल्प लेना चाहिए कि हमारी वाणी, कर्म और चिंतन सदैव सत्य की ओर अग्रसर रहें।
धर्मसभा में यह संदेश भी दिया गया कि सत्य धर्म का पालन करने से व्यक्ति में विनम्रता, आत्मबल और करुणा का उदय होता है। यह धर्म केवल जैन परंपरा का नहीं, बल्कि समस्त मानवता का आदर्श है। जीवन की प्रत्येक परिस्थिति में सत्य का आलंबन लेकर चलना ही आत्मकल्याण का मार्ग है। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और उन्होंने धर्मसभा से प्रेरणा प्राप्त कर उत्तम सत्य धर्म के पालन का संकल्प लिया।

