भक्तों को दर्शन देने के लिए निकले भगवान
वैर (भरतपुर/ कौशलेन्द्र दत्तात्रेय) लघुकाशी के नाम से विख्यात एवं श्री श्री १००८ श्री बाबा मनोहर दास जी महाराज की तपोस्थली कस्बा वैर में जलझूलनी एकादशी के पावन पर्व पर श्री दामोदर जी महाराज मन्दिर एवं दाऊजी महाराज मन्दिर से सुसज्जित बांस के डोलो में विराजमान होकर ठाकुरजी ने भक्तों को दिए दर्शन। ठाकुर जी को मन्दिर प्रांगण में पंचामृत से अभिषेक कराकर नई पोशाक पहना कर सुसज्जित बांस से बने डोलों में विराजमान करा कर ठाकुरजी की आरती उतार कर बैंड बाजों के साथ कस्बा के विभिन्न मार्गों से चांदनी चौक, लाल चौक,पुरानी अनाज मंडी, नगायच मन्दिर होते हुए भक्त जनों को दर्शन देते हुए पुनः मन्दिर पहुंचे। भक्त जनों ने ठाकुरजी को भोग प्रसादी चढ़ा कर भगवान की आरती उतारी।साथ ही एकादशी का व्रत भी ठाकुरजी का प्रसाद पाकर खोला।
नवजात शिशुओं को भगवान के डोलों के नीचे से निकालकर उनकी दीर्घायु की कामना की। ठाकुरजी जी के डोले जैसे ही मन्दिरों से भक्त जनों को दर्शन देने के लिए बाहर निकले भगवान इंद्र ने भी वर्षा कर ठाकुरजी को स्नान कराया।बर्षा होने के उपरांत भी भक्त जनों ने भीगते हुए उत्साह पूर्वक ठाकुरजी के दर्शन किए।आपकों बता दें कि जलझूलनी एकादशी पर रियासत कालीन समय से ठाकुरजी भक्तजनों को दर्शन देने के लिए नगर में भ्रमण करते साथ ही ठाकुरजी का डोला रियासतकालीन प्रताप नहर पर कुछ देर विश्राम करने के लिए ठहरता था। साथ ही भक्तजनों के लिए प्रसाद केला, ककड़ी, आदि को नहर में डाला जाता भक्तजन प्रसाद को पाने के लिए नहर में छलांग लगा कर प्रसाद ग्रहण करते थे। लेकिन समय की विडम्बना है कि नहर में पानी भी नहीं है लोगों ने नहर में आने वाले पानी के मार्गों को अवरूद्ध कर दिया है। एवं नहर में गन्दगी है। शासन प्रशासन का इस ओर कोई ध्यान नहीं है। शासन प्रशासन की अकर्मण्यता के कारण रियासत कालीन समय से चली आ रही परम्परायें दम तोड रही है।साथ ही नबीन पीडी रियासतकालीन धार्मिक परंपराओं से वंचित हो रही हैं।