एक-दूसरे से क्षमा याचना कर मनाया क्षमावाणी पर्व
लक्ष्मणगढ़ (अलवर/ कमलेश जैन) कस्बे के दिगंबर जैन मंदिर में सोमवार को क्षमावाणी पर्व मनाया गया। श्रद्धालुओं ने अर्घ्य चढ़ाकर प्रभु का पूजन किया। प्रभु से परिवार की खुशहाली की मन्नतें मांगी। प्रातः सर्वप्रथम मुख्य अभिषेक कराया। प्रासुक जल से शांति धारा कराई। इसके बाद नित्य नियम की पूजा में देव शास्त्रत्त्, गुरु पूजा, 24 तीर्थंकर पूजा एवं आदिनाथ भगवान की पूजा की गई। मंदिर में शाम को कलशा अभिषेक कर सभी ने एक दूसरे से क्षमा याचना की। समाज के लोगों ने बताया कि प्रत्येक व्यक्ति यदि अपने मन को हटाकर प्रत्येक व्यक्ति से क्षमा याचना करता है, तो सभी के मन का मैल मिट जाता है। और सभी परस्पर मित्र बन जाते हैं।
क्षमावाणी पर्व केवल जैन पर्व ना होकर सर्व सांसारिक पर्व या सार्वभौमिक पर्व माना जाता है।
जैन धर्मावलंबियों ने सालभर में जाने-अनजाने में हुई गलतियों के लिए एक-दूसरे से क्षमा याचना की। जैन मुनियों ने बताया कि क्षमा शब्द मानवीय जीवन की आधारशिला है। जिसके जीवन में क्षमा है, वही महानता को प्राप्त कर सकता है। क्षमावाणी हमें झुकने की प्रेरणा देती है। दशलक्षण पर्व हमें यही सिख देता है कि क्षमावाणी के दिन हमें अपने जीवन से सभी तरह के बैर को मिटाकर प्रत्येक व्यक्ति से क्षमा मांगनी चाहिए। दूसरों को भी क्षमा करने का भाव ही क्षमावाणी है।