हाईकोर्ट का फैसला - अब दो के बजाय एक जमानतदार पर भी मिलेगी रिहाई

Sep 20, 2025 - 13:07
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हाईकोर्ट का फैसला - अब दो के बजाय एक जमानतदार पर भी मिलेगी रिहाई

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपने एक अहम फैसले में दो के बजाए एक जमानतदार के होने पर भी कैदी को जेल से रिहा करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा कि कई ऐसे मामले संज्ञान में आए हैं कि धनाभाव के चलते तमाम कैदी दो जमानदार की व्यवस्था न कर पाने के कारण लंबे समय तक जेल में बंद रहते हैं। 
अब दो के बजाय एक जमानतदार से भी रिहाई मिलेगी। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सामाजिक और आर्थिक स्थिति की वजह से दो जमानतदारों की व्यवस्था नहीं कर पाने पर कई वर्षों से जेल में बंद रहने के कई मामलों का संज्ञान लेकर यह फैसला दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर की एकल पीठ ने गोरखपुर की बच्ची देवी की अर्जी पर दिया है। कोर्ट ने कहा है कि मजिस्ट्रेट या संबंधित न्यायालय आरोपी की आर्थिक और सामाजिक स्थिति को देखते हुए संतुष्टि पर अब दो के बजाय केवल एक ही जमानतदार पर जमानत स्वीकृत करें। साथ ही जमानत बॉन्ड राशि आरोपी की वित्तीय क्षमता के अनुसार तय की जाए।
कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि यदि कोई अभियुक्त सात दिनों के भीतर जमानती पेश नहीं कर पाता है तो जेल अधीक्षक को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव को सूचित करना होगा। इसके बाद उसकी रिहाई के लिए एक वकील की व्यवस्था की जाएगी, ताकि वह बाहर आ सके। अगर किसी अभियुक्त पर कई राज्यों में कई मामले दर्ज हैं तो अदालत गिरीश गांधी बनाम भारत संघ के मामले में दिए गए सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार उसे तुरंत रिहा करेगी।  कोर्ट ने रजिस्ट्रार जनरल को निर्देश दिया है कि वह मुख्य न्यायाधीश के समक्ष इस आदेश की एक प्रति रखें ताकि नए दिशानिर्देश जारी करने पर विचार किया जा सके। साथ ही कोर्ट ने रजिस्ट्रार (अनुपालन) को निर्देश दिया है कि इस आदेश की एक प्रति सभी जिला न्यायाधीशों, पुलिस महानिदेशक, अपर महानिदेशक (अभियोजन) और निदेशक, न्यायिक प्रशिक्षण और अनुसंधान संस्थान, लखनऊ को भेजी जाए। इन अधिकारियों को सुनिश्चित करना होगा कि यह निर्देश प्रभावी ढंग से लागू हो। 
बिना गिरफ्तारी चार्जशीट वाले आरोपियों को जेल भेजने पर रोक-
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक और महत्वपूर्ण फैसला सुनाया। कोर्ट ने उन आरोपियों को सीधे न्यायिक हिरासत (जेल) में भेजने पर रोक लगा दी है जिन्हें पुलिस ने जांच के दौरान गिरफ्तार नहीं किया था। साथ ही निर्देश दिया कि यदि आरोप पत्र गिरफ्तारी के बिना दायर किया गया है तो ट्रायल कोर्ट अभियुक्त को न्यायिक हिरासत में भेजने के बजाय सीधे जमानत बॉन्ड पर रिहा कर सकता है। अभियुक्त को अलग से जमानत आवेदन दायर करने की आवश्यकता नहीं होगी।
गिरीश गांधी बनाम भारत संघ का मामला-
गिरीश गांधी पर 13 अलग-अलग मुकदमे दर्ज थे। सभी में जमानत मिल गई लेकिन वह केवल दो जोड़ी जमानतदार ही ला पाया। बाकी मुकदमों के लिए 22 अन्य जमानतदार नहीं ला पाया और उसे जेल में ही रहना पड़ा। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 13 मुकदमों में दो जोड़ी जमानतदार पर ही रिहा करने का आदेश दिया।

  • कमलेश जैन 

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